West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों दलबदल और बगावत की खबरों से सियासी तापमान बेहद गर्म है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने और पाला बदलने की अटकलों के बीच पार्टी की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा का एक बड़ा बयान सामने आया है। एक हालिया इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने बागी गुट के उन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उनके खेमे को टीएमसी के 20 सांसदों का खुला समर्थन हासिल है।

मोइत्रा ने बेहद तार्किक अंदाज में कहा कि अगर वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में सांसद बागी गुट के साथ खड़े होते, तो अब तक कोई आधिकारिक पत्र सामने आ चुका होता और वे अपना शक्ति प्रदर्शन भी कर चुके होते। चूंकि ऐसा कुछ नहीं हुआ, इसलिए ये दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और हवा-हवाई हैं।

सुष्मिता देव के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया और संख्या साबित करने की चुनौती
वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव के इस्तीफे और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर मीडिया से बात करते हुए महुआ मोइत्रा ने बागी धड़े को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जो लोग बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, संख्या बल साबित करने की असली जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है। बागी नेता लगातार यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके पास कभी 16 तो कभी 20 सांसदों का समर्थन है। मोइत्रा ने कहा कि अगर इस दावे में रत्ती भर भी सच्चाई होती, तो अब तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हो चुकी होती और राज्यपाल या स्पीकर को पत्र सौंप दिया गया होता। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ दोहराया कि बागी गुट के पास किसी भी कीमत पर 20 सांसद मौजूद नहीं हैं।
दलबदल विरोधी कानून की बारीकियां और तकनीकी अड़चनें
सांसदों के टूटने की तकनीकी प्रक्रिया को समझाते हुए महुआ मोइत्रा ने देश के कड़े दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट तर्क दिया कि केवल कुछ सांसदों का एक समूह बना लेने भर से देश के कानून के तहत किसी नए या अलग गुट को मान्यता नहीं मिल जाती है। दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए एक बहुत ही अनिवार्य और कठिन कानूनी शर्त है।
इसके लिए पूरी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों को मूल पार्टी से अलग होना पड़ता है और इसके साथ ही उन्हें औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना पड़ेगा। उन्होंने साफ किया कि यह नियम केवल विधानसभा स्तर पर नहीं, बल्कि पूरी पार्टी के कुल सांसदों पर समान रूप से लागू होता है।
बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य और लोकसभा करियर पर महुआ का तंज
महुआ मोइत्रा ने बागी रुख अपनाने वाले नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि मान लेते हैं कि अगर उनके पास किसी तरह 20 सांसद आ भी जाएं, तो भी उन्हें हासिल क्या होने वाला है? वे संसद में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठने के अलावा कुछ नहीं कर पाएंगे। लोकसभा या किसी भी राज्य की विधानसभा में नियमानुसार किसी भी अलग छोटे गुट या ब्लॉक को स्वतंत्र रूप से मान्यता मिलने की कोई संवैधानिक गुंजाइश नहीं होती है।
मोइत्रा ने हंसते हुए कहा कि वे पश्चिम बंगाल में खुद को ‘काकोली कांग्रेस’, ‘शताब्दी कांग्रेस’ या फिर ‘भाजपा की बी-टीम’ जैसा कोई भी मजाकिया नाम दे सकते हैं और संसद में अलग बेंचों पर बैठ सकते हैं। वे अलग बैठने और भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता, लेकिन ऐसा आत्मघाती कदम उठाते ही उनका लोकसभा करियर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
काकोली घोष दस्तीदार के दावे और एनडीए को समर्थन की सुगबुगाहट
दूसरी तरफ, बागी खेमे की अगुवाई कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के दावों के विपरीत एक बड़ा दावा ठोक दिया है। उनका कहना है कि उनके बागी गुट ने केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को अपना औपचारिक समर्थन देने का अंतिम फैसला कर लिया है। दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों का मजबूत समर्थन है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दलबदल विरोधी दंडात्मक कार्रवाई और अपनी सदस्यता रद्द होने से बचने के लिए बागी नेताओं को टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सदस्यों में से कम से कम 19 सांसदों (यानी दो-तिहाई) के जादुई आंकड़े की जरूरत होगी। बागी गुट का दावा है कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को औपचारिक समर्थन देने की इच्छा जताई है और संसद में एक अलग गुट के तौर पर बैठने के लिए विशेष व्यवस्था की मांग भी की है।










