Poultry Farming : भारत में पारंपरिक खेती-किसानी के तौर-तरीकों से हटकर अब देश के किसान पोल्ट्री फार्मिंग (मुर्गी पालन) के व्यवसाय से कमाई के नए और आधुनिक आयाम स्थापित कर रहे हैं। बिजनेस का यह अनूठा और सफल मॉडल आज छोटे और सीमांत किसानों की किस्मत बदलने में बेहद मददगार साबित हो रहा है। इसी मुनाफेदार कड़ी में ‘कड़कनाथ मुर्गा’ इन दिनों किसानों के लिए कमाई का सबसे धांसू और भरोसेमंद जरिया बन चुका है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में यदि कड़कनाथ को किसानों का ‘चलता-फिरता एटीएम’ (Ambulatory ATM) कहा जाए, तो यह बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। इस विशेष प्रजाति के मुर्गे की बाजार में इतनी जबरदस्त और निरंतर मांग है कि इसे पालने वाले ग्रामीण किसान बहुत ही कम समय में लखपति बनने का गौरव हासिल कर रहे हैं।

कड़कनाथ की अद्वितीय विशेषताएं और इसका सेहतमंद न्यूट्रिशन प्रोफाइल
कड़कनाथ मुर्गे की सबसे बड़ी और मुख्य खासियत इसका पूरा काला रंग है। इसकी त्वचा, चोंच, पैर, जुबान, मीट और यहां तक कि इसकी हड्डियां भी पूरी तरह से काले रंग की होती हैं। औषधीय गुणों से भरपूर इसका मीट पोषण का खजाना माना जाता है, जिसमें साधारण सफेद मुर्गों के मुकाबले प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जबकि फैट (वसा) और कोलेस्ट्रॉल का स्तर ना के बराबर पाया जाता है।
स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गुणकारी होने के कारण डॉक्टर भी इसके सेवन की सलाह देते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे पालने का खर्च भी बेहद मामूली आता है क्योंकि यह ‘बैकयार्ड पोल्ट्री’ यानी घर के आंगन या खेत के पिछले हिस्से में रसोई के बचे हुए वेस्ट फूड, हरी सब्जियां और प्राकृतिक कीड़े-मकोड़े खाकर आसानी से तैयार हो जाता है। जब भी किसानों को अचानक पैसों की आवश्यकता होती है, वे इसे कड़क दाम में बेचकर तुरंत तगड़ा कैश हासिल कर लेते हैं।
कड़कनाथ मुर्गे को पालने का सबसे सरल और किफायती तरीका
कड़कनाथ नस्ल के मुर्गे को पालना अन्य विदेशी नस्लों की तुलना में बहुत ही आसान, व्यावहारिक और किफायती माना जाता है। इसके व्यावसायिक पालन के लिए किसानों को बाजार में मिलने वाले महंगे दानों या रेडीमेड फीड पर भारी-भरकम पैसे बर्बाद करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती है। इस व्यवसाय की शुरुआत में केवल पहले एक से डेढ़ महीने तक छोटे चूजों की विशेष देखभाल करनी होती है। इन्हें ब्रोडर हाउस में रखकर एक निश्चित व सही तापमान प्रदान किया जाता है और बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी विटामिंस व शुरुआती दवाएं दी जाती हैं। इसके बाद, जब चूजे थोड़े बड़े और मजबूत हो जाते हैं, तो उन्हें खुले आंगन, बाग या खेत में स्वतंत्र रूप से चरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
न्यूनतम निवेश में अधिकतम लाभ और शेड निर्माण की जरूरी सावधानियां
ये मुर्गियां घर की बची हुई कटी-फटी सब्जियां, रसोई का जूठा वेस्ट और आसपास के मैदानों से प्राकृतिक कीड़े-मकोड़े खाकर ही मात्र 4 से 5 महीने के भीतर डेढ़ से दो किलोग्राम के वयस्क वजन तक आसानी से पहुंच जाती हैं। कड़कनाथ पालन शुरू करते समय पशुपालकों को बस इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उनके रहने के लिए बनाया जाने वाला शेड (दड़बा) हमेशा जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर हो और पूरी तरह से हवादार व सुरक्षित हो। इसके अतिरिक्त, एक बेहद जरूरी सलाह यह है कि चूजे हमेशा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी कृषि विज्ञान केंद्र या सरकारी कुक्कुट पालन संस्था से ही खरीदें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें समय पर उचित टीका (वैक्सीनेशन) लगा हुआ है और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
मीट की बाजार में भारी मांग और साधारण मुर्गे से कई गुना अधिक कीमत
व्यावसायिक बाजार में कड़कनाथ की कीमत आम मुर्गों के मुकाबले कई गुना अधिक मिलती है, जिसके कारण यह सीधे तौर पर किसानों के लिए मोटी कमाई करने वाली एक बेहतरीन मशीन साबित हो रहा है। जहां एक तरफ साधारण ब्रॉयलर मुर्गा बेहद कम और सस्ते दामों पर बिकता है, वहीं दूसरी तरफ औषधीय गुणों से भरपूर कड़कनाथ का ब्लैक मीट बाजार में 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक के ऊंचे और प्रीमियम रेट पर हाथों-हाथ बिक जाता है। बड़े शहरों, होटलों और रेस्टोरेंट में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे इसके उत्पादकों को कभी भी मंदी का सामना नहीं करना पड़ता।
काले अंडों की बिक्री से भी होती है सालभर मोटी और नियमित कमाई
मीट के व्यवसाय के अलावा, कड़कनाथ मुर्गियों के अंडे भी किसानों के लिए दैनिक आय का एक बहुत बड़ा और मजबूत स्रोत बनते हैं। इसके पोषक तत्वों से भरपूर अंडे सामान्य अंडों की तुलना में बहुत महंगे बिकते हैं और बाजार में इनकी कीमत 20 रुपये से लेकर 30 रुपये प्रति पीस (प्रति अंडा) तक आसानी से मिल जाती है। यही मुख्य वजह है कि कड़कनाथ का यह पूरा बिजनेस मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए एक बेहतरीन वित्तीय सुरक्षा चक्र प्रदान करता है। जब भी किसी किसान परिवार को अपनी खेती, बच्चों की पढ़ाई या चिकित्सा के लिए तुरंत नगद पैसों की आवश्यकता होती है, वह अपने कड़कनाथ स्टॉक को स्थानीय बाजार में बेचकर अच्छी-खासी रकम कमा लेता है और अपनी हर जरूरत को स्वाभिमान के साथ आसानी से पूरा कर लेता है।
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