INDIA Alliance Meeting: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद, देश की राजधानी नई दिल्ली में 8 जून को विपक्षी दलों के महागठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में गठबंधन में शामिल सभी 25 प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने शिरकत की। बैठक के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बेहद आक्रामक और वैचारिक वक्तव्य दिया, जिसे बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर भी साझा किया। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि जैसा कि गठबंधन के कई सम्मानित साथियों ने कहा है, कांग्रेस पार्टी की मुख्य भूमिका किसी पर प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि आप सभी दलों को पूरे प्यार, सम्मान और स्नेह के साथ एक मंच पर एकजुट रखना है।

शैव परंपरा की तरह गठबंधन का सारा जहर पी जाने को तैयार: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने गठबंधन के भीतर चल रही आपसी खींचतान और आलोचनाओं पर बेहद परिपक्व और दार्शनिक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने अपने भाषण में अतीत का एक संस्मरण सुनाते हुए कहा, “कई साल पहले, मेरी अपने एक बहुत अच्छे दोस्त से किसी विषय पर तीखी बहस हो गई थी। मैंने उससे स्पष्ट कहा था कि तुम जो रास्ता अपना रहे हो वह गलत है, तो उसका जवाब था कि जब पूरी दुनिया ही गलत रास्ते पर चल रही हो, तो इसकी आदत डाल लेनी चाहिए।” नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि आज इस बैठक में कांग्रेस पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर जो भी बातें या शिकायतें की गई हैं, उनका आक्रामक जवाब देना मेरा काम नहीं है।

मेरा असली कर्तव्य तो भगवान शिव की शैव परंपरा की तरह सब कुछ अपने भीतर समाहित कर लेना है। जिस प्रकार नीली गर्दन वाले महादेव (शिव) सृष्टि को बचाने के लिए सारा विष पी गए थे, उसी तरह मैं भी सब स्वीकार करूँगा। आप सभी साथी मेरे बारे में या कांग्रेस की नीतियों के विषय में जो भी आलोचना करना चाहते हैं, उसे हम बिना किसी मलाल के, चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान के साथ सहर्ष स्वीकार करेंगे।
हमारा मुख्य रोल कांग्रेस का अहंकार दिखाना नहीं, सबको साथ लाना है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने गठबंधन के सहयोगियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारा पूरा प्रयास आपको संतुष्ट और खुश रखने का रहेगा, क्योंकि राष्ट्रीय राजनीति में हमारा रोल आपकी क्षेत्रीय प्राथमिकताओं से बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं यह बात किसी भी तरह के राजनीतिक घमंड या अहंकार में आकर नहीं कह रहा हूं। हमारा रोल केवल यही है कि देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए हम सभी विचारधाराओं और क्षेत्रीय ताकतों को आपसी स्नेह और भाईचारे के सूत्र में पिरोकर एक मजबूत दीवार के रूप में खड़ा कर सकें।
चाहे सिर कट जाए, लेकिन बीजेपी और आरएसएस के सामने नहीं झुकेंगे
अपने राजनैतिक सफर और कांग्रेस की मूल विचारधारा का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं साल 2004 से लगातार कांग्रेस पार्टी का सांसद हूं, जब मैंने अपना पहला चुनाव जीता था। हमारी पार्टी भारत के अन्य सभी राजनीतिक दलों की तुलना में बिल्कुल अलग तरह से संगठित और विकसित हुई है, और यह बात मैं पूरी विनम्रता के साथ कह रहा हूं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस का जन्म आधुनिक भारत के निर्माण से बहुत पहले, ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक रेजिस्टेंस मूवमेंट (प्रतिरोध आंदोलन) के रूप में हुआ था।
अन्य राजनीतिक दलों के विपरीत, हमारी स्थापना आजाद भारत के सरकारी ढांचे, मशीनरी या संरक्षण का लाभ उठाकर नहीं की गई थी।” उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि हम कांग्रेस के लोग अपनी आखिरी सांस तक आरएसएस के संकीर्ण विजन के खिलाफ लड़ेंगे। हम कांग्रेस के झंडे तले मरना पसंद करेंगे, बजाय इसके कि हम भाजपा या आरएसएस के फासीवादी विजन के साथ कोई समझौता करें या उनके सामने घुटने टेकें। ऐसा कराने के लिए उन्हें हमारे सिर काटने होंगे। मैं देश भर के करोड़ों समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रग-रग से वाकिफ हूं, जो सीना ठोककर कहेंगे कि हमारे सिर कलम कर दो, लेकिन हम आरएसएस के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।
विपक्ष में पुराना कन्फ्यूजन, देश के सभी लोकतांत्रिक संस्थान अब निष्पक्ष नहीं रहे
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने गठबंधन के दलों को जमीनी हकीकत से रूबरू कराते हुए एक कड़वी सच्चाई की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा कि मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि इस समूह में अभी भी एक बड़ा कन्फ्यूजन (भ्रम) बना हुआ है। समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसी ताकतवर क्षेत्रीय पार्टियों को लगता है कि उन्होंने अतीत में जिन पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों या टूल्स का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए किया था, वे आज के दौर में भी उतने ही प्रभावी रहेंगे।
उन्होंने आगाह किया कि वे टूल्स केवल तभी तक सही काम करते थे जब तक भारतीय राज्य के लोकतांत्रिक संस्थान विपक्ष को चुनाव लड़ने के लिए एक न्यूट्रल और निष्पक्ष फील्ड प्रदान करते थे। लेकिन आज वह निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वर्तमान समय में सत्ताधारी दल बीजेपी ने राज्य के सभी संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थानों पर अपना एकतरफा नियंत्रण स्थापित कर लिया है। आज देश का लीगल सिस्टम, पूरी ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही), देश की तमाम खुफिया एजेंसियां और यहां तक कि इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) भी पूरी तरह सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है।
टीएमसी के मित्रों को चुनावी शुचिता को लेकर सपने की दुनिया से बाहर आना होगा
पश्चिम बंगाल की राजनीति का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मेरे बहुत से अच्छे दोस्त हैं, जो चुनाव के दौरान अपनी भारी जीत को लेकर 100% आश्वस्त थे। मैं उनसे लगातार कहता रहा कि आप लोग असलियत से दूर किसी सपनों की दुनिया में जी रहे हैं। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि पर्दे के पीछे क्या खेल होता है। मैंने यही खेल गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में बहुत करीब से देखा है, जहां प्रशासनिक ताकत के बल पर जनादेश को प्रभावित किया गया। इसके बावजूद आप में से कई साथी अभी भी इस कड़वी हकीकत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
हम 2024 का चुनाव हारे नहीं हैं, जनता का जनादेश चोरी किया गया
विपक्ष के भीतर की हताशा को दूर करते हुए राहुल गांधी ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मूल रूप से एक संघर्ष करने वाली ताकत है और इसे काम करने के लिए किसी सरकारी तंत्र की बैसाखी या न्यूट्रैलिटी (निष्पक्षता) की कोई जरूरत नहीं है। देश के लोकतांत्रिक संस्थानों का जितना अधिक गला घोंटा जाएगा, कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए उतनी ही आक्रामकता और तेजी के साथ सड़कों पर उतरेगी। हमारी पार्टी सत्य, अहिंसा और करुणा के सर्वोच्च आदर्शों पर चलती है। उन्होंने सहयोगियों से कहा कि मुझे अपने ही साथियों से लड़ने में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है।
आप सभी हमारे अभिन्न मित्र हैं जिनसे हम बेहद प्यार करते हैं। कृपया इस बुनियादी बात को गहराई से समझिए कि हम साल 2024 का पिछला आम चुनाव हारे नहीं हैं, बल्कि नैतिक रूप से हमने वह चुनाव जीता था। अगर आप पूछते हैं कि नीतीश कुमार जैसे नेता गठबंधन छोड़कर क्यों गए, तो मैं साफ कर दूं कि वह कांग्रेस की किसी गलती की वजह से नहीं, बल्कि इसी व्यवस्था के चौतरफा दबाव के कारण गए थे।
चुनाव आयोग और सोशल मीडिया पर पहचान को लेकर राहुल का बड़ा खुलासा
राहुल गांधी ने डिजिटल स्पेस और सोशल मीडिया के मोर्चे पर विपक्ष के साथ हो रहे कथित भेदभाव का भी सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जो थोड़े-बहुत तकनीकी उपकरण हमारे पक्ष में काम कर रहे हैं, वे भी पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे क्योंकि सत्ता पक्ष का नियंत्रण लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1927 में जब महात्मा गांधी ने पूर्ण आजादी का आह्वान किया था, तब हमारी पार्टी एक राजनीतिक दल से बदलकर एक राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध आंदोलन बन गई थी। आज फिर हमें उसी भावना की जरूरत है।
राहुल ने बताया, “आज मेरे यूट्यूब चैनल पर 10 मिलियन (एक करोड़) से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, लेकिन पूरी सरकारी मशीनरी द्वारा एल्गोरिदम के जरिए मेरे अकाउंट की रीच को दबाकर (Suppress) रखा जाता है। इसलिए यदि आप में से किसी को भी यह लगता है कि सोशल मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र है और इससे विपक्ष को बराबरी का सपोर्ट मिल रहा है, तो आप एक बहुत बड़े छलावे और अलग ही सच्चाई में जी रहे हैं। पूरा मुख्यधारा का मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ब्यूरोक्रेसी और खुफिया एजेंसियां इस समय वर्तमान सरकार को किसी भी कीमत पर सत्ता में बनाए रखने के लिए एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहे हैं।”
ममता, उद्धव और तेजस्वी को भी है 100% चुनाव चुराए जाने का अंदेशा
गठबंधन के भीतर चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि इस कमरे में बैठीं ममता बनर्जी भले ही 100% आश्वस्त न हों, लेकिन उन्हें भी 90% यही यकीन है कि उनका वास्तविक चुनाव और जनादेश उनसे अवैध तरीके से चुराया गया था। इसी तरह उद्धव ठाकरे और मेरे छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी कम से कम 40 से 50 फीसदी यही अंदेशा है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके उनके वैध वोट चुराए गए हैं। मैं आपको पूरी जिम्मेदारी के साथ बताना चाहता हूं कि आज देश में 100% चुनाव और जनादेश की चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। कृपया अपने मन से इस संशय को पूरी तरह निकाल दें और हकीकत का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं।
बीजेपी को हराना बेहद आसान, बस विपक्ष को सड़क पर उतरना होगा
भाषण के समापन सत्र में राहुल गांधी ने गठबंधन के नेताओं में एक नई ऊर्जा और नया विश्वास फूंकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हमारे बीच अक्सर बातचीत के दौरान एक अजीब सी उदासी और लाचारी दिखाई देती है। लोग मायूस होकर सोचते हैं कि इतनी बड़ी सरकारी ताकत और धनबल वाली बीजेपी को हम कैसे हरा पाएंगे? मैं आपको यह पूरी गारंटी के साथ विश्वास दिलाना चाहता हूं कि यदि हम सभी दल अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साथ चट्टान की तरह खड़े हो जाएं और सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध प्रदर्शन (Resistance) शुरू कर दें, तो इस घमंडी सरकार को धूल चटाना बेहद आसान काम है।
पिछले चुनाव की शुरुआत में इस कमरे में बैठे मेरे अलावा किसी भी अन्य नेता को यह अटूट विश्वास नहीं था कि हम बीजेपी को इतनी कड़ी टक्कर देकर बैकफुट पर ला सकते हैं। लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। अब इस कमरे में मौजूद हर एक इंसान को दिल से यह मानना शुरू कर देना चाहिए कि हम उन्हें आगामी हर चुनाव में हराने जा रहे हैं। आप सभी नेता इस अडिग विश्वास के साथ अपने राज्यों में वापस लौटें, फिर देखिए कि चाहे वे कितनी भी प्रशासनिक धोखाधड़ी या बेईमानी क्यों न कर लें, देश की जागरूक जनता के सामने वे हर राज्य में चुनाव दर चुनाव बुरी तरह हारेंगे।
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