Sakti Liquor Scandal : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शासकीय देसी शराब दुकान से खरीदी गई पूरी तरह से सीलपैक शराब की बोतल के भीतर एक मरा हुआ कीड़ा पाया गया है। इस अजीबोगरीब और अस्वच्छ घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आम जनता और आबकारी उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश और नाराजगी व्याप्त है।

शराब प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने इस लापरवाही को स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ बताते हुए सरकार से पैकेजिंग, बॉटलिंग प्लांट और आबकारी निगरानी व्यवस्था की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। हैरान करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ के भीतर पिछले महज 10 दिनों के भीतर इस तरह का यह दूसरा बड़ा और गंभीर मामला उजागर हुआ है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।

बालोद में भी सामने आया था ऐसा ही मामला
सक्ती जिले की इस घटना से ठीक पहले, छत्तीसगढ़ के ही बालोद जिले के प्रसिद्ध तांदुला डैम के पास संचालित एक सरकारी देसी शराब दुकान से भी ऐसा ही एक खौफनाक मामला सामने आ चुका है। वहां एक ग्राहक द्वारा खरीदी गई ‘रोमियो’ ब्रांड की सीलबंद देसी शराब की बोतल के अंदर कांच के नुकीले और धारदार टुकड़े तैरते हुए पाए गए थे। इस गंभीर अनियमितता को लेकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने खुद मौके पर पहुंचकर बकायदा एक वीडियो रिकॉर्ड किया था और उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर सरकार को घेरा था। बालोद के उस हाई-प्रोफाइल मामले में चौतरफा घिरने के बाद आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आनन-फानन में लीपापोती करते हुए मामले की आंतरिक जांच कराने का केवल खोखला आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर कोई कड़ा सुधार नहीं दिखा।
डभरा की शासकीय दुकान से खरीदा गया था प्लेन पौवा
जमीनी सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, ताजा विवाद सक्ती जिले के डभरा विकासखंड में स्थित शासकीय देशी शराब दुकान का है। यहां गुरुवार के दिन एक स्थानीय उपभोक्ता ने नियमानुसार काउंटर से ‘प्लेन’ ब्रांड का एक पौवा (शराब की छोटी बोतल) खरीदा था। वह व्यक्ति जब शराब का सेवन करने के लिए एक शांत स्थान पर गया और जैसे ही उसने बोतल की सील खोलने का प्रयास किया, तो पारदर्शी कांच के भीतर उसे एक बड़ा कीड़ा तैरता हुआ साफ नजर आया। उपभोक्ता ने तुरंत इसकी शिकायत दुकान पर तैनात सेल्समैन और सुपरवाइजर से की, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति और वहां मौजूद अन्य लोगों ने मोबाइल से इसका स्पष्ट वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड कर दिया, जो अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा रहा है।
सरकारी राजस्व के बावजूद गुणवत्ता मानकों की अनदेखी
डभरा का यह वीडियो अब छत्तीसगढ़ के अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें साफ तौर पर सीलबंद शीशे की बोतल के अंदरूनी हिस्से में कीड़ा दिखाई दे रहा है। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद आम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सरकार खुद अपने नियंत्रण में और ऊंचे दामों पर वैध शराब बेच रही है, तो इसके निर्माण और पैकेजिंग के समय स्वच्छता व गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) का सख्ती से पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? उपभोक्ताओं ने आबकारी विभाग को घेरते हुए कहा कि सरकारी खजाने में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इस सेक्टर में लोगों की सेहत, सुरक्षा और उनके भरोसे को बनाए रखने के लिए उत्पादों की नियमित रूप से लैब टेस्टिंग और औचक जांच होना बेहद अनिवार्य है।
लापरवाही या तकनीकी खराबी?
औद्योगिक और आबकारी मामलों के जानकारों के अनुसार, किसी भी स्वचालित या मैन्युअल बॉटलिंग प्लांट में पूरी तरह से पैक हो चुके उत्पादों के भीतर इस तरह की बाहरी अशुद्धि या जीव मिलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से पैकेजिंग प्रक्रिया के दौरान की जाने वाली घोर मानवीय लापरवाही, डिस्टिलरी के भंडारण गृह (गोदाम) में साफ-सफाई की कमी या फिर बॉटलिंग मशीनों में आई कोई गंभीर तकनीकी खराबी जिम्मेदार हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो क्लिप के आधार पर किसी अंतिम विधिक निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा। इस विवादित बोतल को आबकारी कस्टडी में लेकर इसकी वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच और विभागीय लैब परीक्षण कराने के बाद ही वास्तविक तकनीकी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
आबकारी विभाग के मौन पर जनता का फूटा गुस्सा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय जनता और उपभोक्ता अधिकार मंचों ने जिला आबकारी विभाग से इस पूरे सिंडिकेट और सप्लायर के खिलाफ त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का दो टूक कहना है कि यदि विभागीय जांच में शिकायत शत-प्रतिशत सही पाई जाती है, तो संबंधित बॉटलिंग कंपनी का लाइसेंस तुरंत निरस्त किया जाए और दोषी अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए। इस बेहद संवेदनशील और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे पर जब डभरा आबकारी वृत्त प्रभारी कोमल सिदार का पक्ष जानने के लिए मीडिया कर्मियों द्वारा उनके शासकीय मोबाइल फोन पर बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा और दूरी बना ली, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह और गहरा गया है।
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