Assam Flood: असम में बाढ़ की स्थिति शुक्रवार को भी गंभीर बनी हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बाढ़ का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग अब भी प्रभावित हैं। बाढ़ से एक और व्यक्ति की मौत होने के बाद इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। वहीं, प्रभावित जिलों और लोगों की संख्या में पहले के मुकाबले कमी आई है।

चराइदेव में एक और व्यक्ति की मौत
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ओर से जारी ताजा आधिकारिक बुलेटिन के मुताबिक, शुक्रवार को एक और मौत की पुष्टि हुई। यह मौत चराइदेव जिले के महमोरा रेवेन्यू सर्कल में दर्ज की गई है। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं के कारण अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

13 जिलों के 464 गांव अब भी बाढ़ प्रभावित
ASDMA के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 13 जिले अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें शिवसागर, गोलाघाट, नागांव, होजई, सोनितपुर, धेमाजी, दरांग, बिस्वनाथ, कामरूप मेट्रो, लखीमपुर, उदलगुड़ी, जोरहाट और चराइदेव शामिल हैं। इन जिलों के 33 राजस्व मंडल और 464 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। कई इलाकों में पानी का स्तर कम होने के बावजूद सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है।
1.55 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, असम में फिलहाल कुल 1,55,849 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके अलावा 14,382 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है। बाढ़ के कारण खेती-किसानी को भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों की फसलें प्रभावित होने के साथ-साथ कई इलाकों में सड़कों, पुलों, तटबंधों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने की समीक्षा बैठक
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के सबसे अधिक प्रभावित चार जिलों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव और गोलाघाट जिलों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक सरकारी सहायता तेजी से पहुंचाई जाए और नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए।

9 से 30 अगस्त तक घर-घर होगा नुकसान का सर्वे
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार 9 अगस्त से 30 अगस्त तक सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर नुकसान का आकलन करेगी। इस सर्वे के दौरान सरकारी अधिकारी प्रभावित परिवारों और संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाएंगे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सर्वे के दौरान नुकसान की तस्वीरें एक विशेष मोबाइल ऐप पर अपलोड की जाएं, ताकि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा सके।
प्रभावित परिवारों के नुकसान का दोबारा होगा सत्यापन
सरकार की योजना के मुताबिक, 30 अगस्त तक प्राथमिक नुकसान आकलन पूरा किया जाएगा। इसके बाद प्रभावित परिवारों के साथ नुकसान का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारियों और संबंधित वृत्ताधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित लोगों के साथ संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करें। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सरकारी नियमों के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को अधिकतम संभव राहत उपलब्ध कराई जाए।
45 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे
बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। वर्तमान में राज्य के छह जिलों में 133 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में करीब 45 हजार विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए भोजन, रहने की व्यवस्था और जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने तक राहत और बचाव अभियान जारी रहेगा।
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