Sohagi Barwa Tigers : उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य से इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के शिवपुर रेंज के जंगलों में एक बेहद दुर्लभ और दिलचस्प नजारा देखा जा रहा है, जो जंगल के पारंपरिक नियमों से बिल्कुल अलग है। बिहार के मशहूर वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से सीमा पार कर आया एक शक्तिशाली नर बाघ इन दिनों सोहगीबरवा को अपना नया ठिकाना बना चुका है। खास बात यह है कि वह यहां रह रही लखीमपुर खीरी की एक बाघिन और उसके दो छोटे शावकों के साथ लगातार वक्त बिता रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों का यह आपसी तालमेल न सिर्फ उनके प्राकृतिक आवागमन को दर्शाता है, बल्कि इस अभयारण्य में बाघों की आबादी बढ़ने के नए द्वार भी खोल रहा है।

कैमरों में कैद हुई अद्भुत तस्वीरें और वन विभाग की मुस्तैदी
यह पूरी अनोखी कहानी उस वक्त खुलकर सामने आई जब सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में बाघों की नियमित गणना का काम शुरू किया गया। वन विभाग द्वारा लगाए गए अत्याधुनिक ट्रैप कैमरों ने शिवपुर रेंज के घने जंगलों से कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो फुटेज रिकॉर्ड किए, जिसने वन अधिकारियों को हैरान और उत्साहित कर दिया। ज्ञात हो कि पिछले साल लखीमपुर खीरी के दक्षिणी वन क्षेत्र से रेस्क्यू की गई एक बाघिन को उसके दो शावकों के साथ इसी शिवपुर रेंज में सुरक्षित छोड़ा गया था। अब ट्रैप कैमरों के रिकॉर्ड से पता चला है कि बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व से आया नर बाघ बिना किसी हिंसक गतिविधि के लगातार इस बाघिन के इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

वन्यजीवों का अनोखा व्यवहार और आपसी संघर्ष का खात्मा
वन्यजीव विज्ञान और विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगलों में बाघों का यह व्यवहार बेहद असाधारण माना जाता है। अमूमन जब भी कोई नया नर बाघ किसी दूसरी मादा बाघिन के क्षेत्र (टेरिटरी) में दाखिल होता है, तो दोनों के बीच अपनी सीमा को लेकर खूनी संघर्ष होना तय होता है। इसके अलावा, कई बार नए नर बाघ मादा के पुराने शावकों को अपनी राह का रोड़ा मानकर उन पर जानलेवा हमला भी कर देते हैं। लेकिन सोहगीबरवा के शिवपुर रेंज में प्रकृति का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। यहां का प्रवासी नर बाघ न केवल उस बाघिन के इलाके में शांति से घूम रहा है, बल्कि वह उन नन्हे शावकों के साथ भी बेहद दोस्ताना और सुरक्षित माहौल साझा कर रहा है, जो दोनों के बीच गहरे सामंजस्य का प्रतीक है।
अंतरराष्ट्रीय टाइगर कॉरिडोर की भूमिका और वैज्ञानिक जांच
इस अभयारण्य की भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों के मुक्त आवागमन के लिए एक वरदान की तरह काम करती है। सोहगीबरवा, बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व और पड़ोसी देश नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान को आपस में जोड़ने वाला एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण ‘वाइल्डलाइफ टाइगर कॉरिडोर’ है। इसी प्राकृतिक रास्ते का इस्तेमाल कर वन्यजीव बिना किसी मानवीय बाधा के एक देश से दूसरे देश और एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमाओं को पार करते हैं। वर्तमान में चल रही बाघों की इस विशेष गणना को सटीक बनाने के लिए अभयारण्य की सभी सातों रेंजों में 160 से अधिक ट्रैप कैमरे एक्टिव किए गए हैं। इसके साथ ही वनकर्मियों द्वारा इकट्ठा किए गए बाघों के पगमार्क (पंजों के निशान) और अन्य जैविक नमूनों (मल आदि) को गहन वैज्ञानिक जांच के लिए देहरादून स्थित ‘वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (WII) भेजा गया है।
उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद और वन विभाग का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ निरंजन सुर्वे ने बेहद सकारात्मक उम्मीदें जताई हैं। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि देहरादून से अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही अभयारण्य में बाघों की वास्तविक संख्या, उनकी सटीक लोकेशन और उनकी गतिविधियों की कोई भी आधिकारिक या कानूनी पुष्टि की जा सकेगी। हालांकि, शुरुआती जमीनी संकेतों और कैमरों की फुटेज को देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोहगीबरवा का वातावरण बाघों के फलने-फूलने के लिए बेहद अनुकूल हो चुका है। यह अनोखी दोस्ती आने वाले समय में सोहगीबरवा में बाघों के बढ़ते कुनबे और पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन भविष्य की ओर सीधा इशारा कर रही है।
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