Anil Menon Spacewalk: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत और भारतीय मूल के लोगों के लिए एक और गर्व का क्षण सामने आया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से बाहर निकलकर अपनी पहली सफल स्पेसवॉक पूरी की। यह उनके अंतरिक्ष करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस मिशन के दौरान उन्होंने पृथ्वी से लगभग 421 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष में काम करते हुए एक ऐतिहासिक पड़ाव हासिल किया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 340 से 421 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच परिक्रमा करता है और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगशालाओं में शामिल है।
जेसिका मीर के साथ कर रहे हैं स्पेसवॉक मिशन
नासा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार अनिल मेनन इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ मिलकर तीन स्पेसवॉक करने वाले हैं। इस श्रृंखला की पहली स्पेसवॉक 6 अगस्त से शुरू हुई, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहरी हिस्से में रखरखाव, उपकरणों की स्थापना, तकनीकी निरीक्षण और वैज्ञानिक कार्यों को अंजाम देते हैं। यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे शून्य गुरुत्वाकर्षण और कठोर अंतरिक्षीय परिस्थितियों में विशेष स्पेससूट पहनकर पूरा करना होता है।
केरल से जुड़ी हैं पारिवारिक जड़ें
अनिल मेनन का मूल संबंध भारत के केरल राज्य के पालक्काड जिले से है। हालांकि उनका जन्म 15 अक्टूबर 1976 को अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। वे भारतीय और यूक्रेनी मूल के परिवार से संबंध रखते हैं। अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण वे केवल एक अंतरिक्ष यात्री ही नहीं, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ (इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन), मैकेनिकल इंजीनियर और यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स में कर्नल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी उपलब्धियां विज्ञान, चिकित्सा और रक्षा जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई हैं।
शिक्षा और पेशेवर जीवन रहा बेहद शानदार
अनिल मेनन की शैक्षणिक यात्रा भी अत्यंत प्रभावशाली रही है। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और फिर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई पूरी की। चिकित्सा शिक्षा के बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच, गैल्वेस्टन से इमरजेंसी मेडिसिन और एयरोस्पेस मेडिसिन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। विज्ञान और चिकित्सा के इस अनूठे संयोजन ने उन्हें अंतरिक्ष अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया।
नासा तक पहुंचने का सफर
वर्ष 2021 में अनिल मेनन का चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के लिए किया गया था। चयन के बाद उन्होंने कठोर शारीरिक, तकनीकी और अंतरिक्ष संबंधी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। वर्ष 2024 में उन्होंने नासा के 23वें अंतरिक्ष यात्री वर्ग के साथ आधिकारिक रूप से प्रशिक्षण पूरा किया। इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े अपने पहले मिशन की जिम्मेदारी सौंपी गई। लगातार प्रशिक्षण, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के बल पर उन्होंने अपने पहले स्पेसवॉक मिशन तक का सफर तय किया।
परिवार का भी है अंतरिक्ष से गहरा नाता
अनिल मेनन के परिवार का संबंध भी अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी अन्ना मेनन भी अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी हुई हैं और एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) में कार्यरत हैं। अन्ना मेनन वर्ष 2024 में आयोजित पोलारिस डॉन (Polaris Dawn) मिशन का हिस्सा रही थीं, जिसे निजी अंतरिक्ष मिशनों के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। अनिल और अन्ना मेनन के दो बच्चे हैं और दोनों ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने अनिल मेनन
अनिल मेनन की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि विज्ञान, शिक्षा और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। भारतीय मूल से जुड़ी उनकी पहचान दुनिया भर के युवाओं को यह संदेश देती है कि मेहनत, उत्कृष्ट शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी पहली सफल स्पेसवॉक अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और आने वाले समय में वे वैज्ञानिक मिशनों के माध्यम से मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में और भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
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