Emergency Alert Message : केंद्र सरकार ने हाल ही में बड़े स्तर पर शुरू की गई अपनी महत्वाकांक्षी ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सर्विस’ (Cell Broadcasting Services) को फिलहाल के लिए पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। इस अत्याधुनिक तकनीकी सेवा के माध्यम से किसी भी आपातकालीन स्थिति में एक साथ लाखों मोबाइल उपयोगकर्ताओं को उनके फोन पर सीधे इमरजेंसी अलर्ट और चेतावनी संदेश भेजे जाते थे। हालांकि, अभी इसकी शुरुआत हुए ज्यादा समय नहीं बीता था, लेकिन सरकार ने बिना कोई ठोस सार्वजनिक कारण बताए 12 जून से इस पूरी सेवा पर रोक लगा दी है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा इस संबंध में जारी किए गए आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रणाली में कुछ तकनीकी दिक्कतों (इश्यूज) के आने के कारण इस सर्विस को अगले आदेश तक के लिए स्थगित किया जा रहा है।

क्या प्रधानमंत्री के मोबाइल पर आधी रात को गया अलर्ट बना मुख्य वजह?
इस अचानक लगी रोक के पीछे एक बेहद चौंकाने वाली वजह सामने आ रही है। प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द हिंदू’ ने अपने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के प्रधानमंत्री के निजी या आधिकारिक कॉन्टैक्ट नंबर पर आधी रात को एक टेस्ट या आपातकालीन अलर्ट चला गया था। माना जा रहा है कि इसी बड़ी चूक के कारण इस सर्विस को आनन-फानन में बंद करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, एनडीएमए (NDMA) की तरफ से अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। सामान्य तौर पर, सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज से देश के अति विशिष्ट लोगों (VIPs) के मोबाइल नंबरों को ऐसी सामान्य ब्रॉडकास्टिंग और टेस्टिंग सेवाओं की सूची से हमेशा बाहर रखा जाता है।

देर रात अलर्ट बजने से परेशान हुए थे कई राज्यों के लोग
प्रकाशित रिपोर्ट में आगे यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के राज्य आपदा प्रबंधन विभागों (Disaster Management) की तरफ से जारी किए गए कुछ अलर्ट मैसेजेस के कारण आधी रात को अचानक आम लोगों के मोबाइल फोन तेजी से बजने लगे थे। इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता और परेशानी यह है कि जब भी यह आपातकालीन अलर्ट भेजा जाता है, तो आपका मोबाइल फोन चाहे ‘साइलेंट मोड’ पर हो या फिर ‘स्विच ऑफ’ ही क्यों न हो, उसमें से बेहद तेज और डरावनी चेतावनी ध्वनि (साउंड) बजने लगती है। आधी रात को बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह से फोन बजने के कारण कई इलाकों में नागरिकों के बीच असमंजस और घबराहट की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसकी शिकायतें प्रशासन तक पहुंची थीं।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 2 मई को लॉन्च हुई थी सर्विस
विवादों में आने से पहले, केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 2 मई को इस विशेष मोबाइल-बेस्ड डिजास्टर कम्युनिकेशन सिस्टम को देश के सामने पेश किया था। इसे दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने संयुक्त रूप से कड़ी मेहनत के बाद विकसित किया था। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य बाढ़, भूकंप, चक्रवात, और भारी आकाशीय बिजली जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की सटीक चेतावनियों को समय रहते आम जनता तक पहुंचाना था, ताकि जन-धन के नुकसान को रोका जा सके। इस नए और आधुनिक सिस्टम में पारंपरिक एसएमएस (SMS) सेवा के साथ-साथ अत्याधुनिक सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी को आपस में जोड़ा गया है, जिससे मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर होने की स्थिति में भी लोगों के फोन पर इमरजेंसी अलर्ट मैसेज बिना किसी रुकावट के तुरंत डिलीवर हो सके।
क्या है सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी और यह कैसे काम करती है?
सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी वास्तव में एक ऐसी उन्नत प्रणाली है, जो किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या पूरे शहर में रहने वाले बड़ी संख्या में लोगों को एक ही समय में एक साथ अलर्ट मैसेज भेजने की क्षमता रखती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर मोबाइल नेटवर्क के जाम होने (नेटवर्क कंजेशन) का रत्ती भर भी असर नहीं पड़ता है। इसे सबसे पहले 1990 के दशक में यूरोपीय टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किया गया था और वर्तमान समय में दुनिया के 30 से अधिक विकसित देशों में इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।

यह पूरी तरह से एक ‘वन-वे कम्युनिकेशन’ (एकतरफा संचार) होता है, जो एक विशिष्ट मोबाइल टावर रेंज से जुड़े सभी सक्रिय मोबाइल फोनों पर एक साथ सीधे संदेश प्रसारित कर सकता है। इसके सफल संचालन के लिए न तो किसी इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है और न ही सरकार या टेलीकॉम कंपनियों के पास उस क्षेत्र के मोबाइल यूजर का नंबर होना जरूरी है।
PoK Protests News : PoK में फिर चलीं गोलियां, PAK सेना की फायरिंग में 2 प्रदर्शनकारियों की मौत












