TMC Split : पश्चिम बंगाल की सत्ता पर करीब डेढ़ दशक यानी 15 सालों तक एकछत्र राज करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का यह सबसे कठिन दौर साबित हो रहा है। सूबे की कमान हाथ से जाने के बाद अब उनकी खुद की बनाई पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी बिखरती हुई नजर आ रही है। बंगाल के राजनीतिक गलियारों से आ रही ताजा और बेहद चौंकाने वाली खबरों के मुताबिक, टीएमसी के बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल बंगाल बल्कि देश की केंद्रीय राजनीति में भी भारी हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के हाथ से उनकी पार्टी पर पकड़ अब पूरी तरह ढीली पड़ती दिखाई दे रही है।

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी सांसदों की गुप्त बैठक
पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी रविवार, 14 जून 2026 को पूरी तरह भड़क उठी। टीएमसी के बागी सांसदों के एक बड़े धड़े ने देश की राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आधिकारिक आवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई असंतुष्ट सांसद शामिल हुए, जिन्होंने ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये और पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई। केंद्रीय मंत्री के घर पर हुई इस रणनीतिक बैठक को टीएमसी में एक बड़ी और औपचारिक टूट के रूप में देखा जा रहा है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे बागी, काकोली घोष दस्तीदार ने किया बड़ा ऐलान
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई लंबी और गहन चर्चा के बाद बागी सांसदों के इरादे पूरी तरह साफ हो गए हैं। इस बगावती गुट की कमान संभाल रहीं टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज बयान दिया। उन्होंने खुले तौर पर घोषणा की कि वे सभी बागी सांसद कल यानी सोमवार, 15 जून 2026 को देश की संसद में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात करेंगे। काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि वे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एक नए और स्वतंत्र विधायी गुट के रूप में मान्यता देने की आधिकारिक मांग करेंगे, जिससे पार्टी का विभाजन तय माना जा रहा है।
दल-बदल कानून से बचने की रणनीति, आवश्यक जादुई आंकड़े का दावा
संसदीय नियमों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल से अलग गुट बनाने और अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए कुल सांसदों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। सूत्रों का कहना है कि बागी गुट ने इस कानूनी अड़चन यानी दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए आवश्यक संख्या बल पूरी तरह जुटा लिया है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में टीएमसी के कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जो पिछले कुछ समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बेहद नाराज चल रहे थे। अगर सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष इस नए गुट को मान्यता दे देते हैं, तो संसद के भीतर ममता बनर्जी की पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा और सदन में उनकी ताकत काफी कम हो जाएगी।
टीएमसी के भीतर पुराना बनाम नया का विवाद और ममता की कमजोर होती पकड़
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी कलह कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से पार्टी के पुराने वफादार नेताओं और नए रणनीतिकारों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही थी। ममता बनर्जी द्वारा कुछ खास नेताओं को जरूरत से ज्यादा तरजीह दिए जाने के कारण जमीनी स्तर के नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने समय रहते इस असंतोष को दबाने का प्रयास नहीं किया, जिसका नतीजा आज इस बड़ी टूट के रूप में सामने आ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऐतिहासिक फूट के बाद ममता बनर्जी के लिए अपनी राजनीतिक साख को बचाए रखना और आगामी चुनावों में पार्टी को एकजुट रख पाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।
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