TMC Crisis : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाया है। ममता बनर्जी ने पार्टी की युवा और महिला दोनों ही प्रमुख शाखाओं में व्यापक स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल किया है। इस बड़े बदलाव के तहत कई दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है, जबकि कई नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के भीतर यह कदम हालिया चुनावी हार के बाद उभरे आंतरिक असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल को शांत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

नेतृत्व में अचानक बदलाव
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी ने महज एक हफ्ते पहले ही बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन के दौरान सांसद सायोनी घोष को टीएमसी युवा विंग के अध्यक्ष पद पर दोबारा नियुक्त किया था। हालांकि, बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एक सप्ताह के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष की जगह अब अर्नब बनर्जी को युवा विंग की कमान सौंपते हुए नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, कोलकाता दक्षिण की सांसद माला राय को भी ‘तृणमूल महिला कांग्रेस’ के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। महिला विंग की कमान अब कालिगंज की विधायक अलिफा अहमद को दी गई है।

बगावत की सुगबुगाहट: बागी गुट में शामिल हुईं सायोनी और माला
पार्टी के भीतर इस समय सायोनी घोष और माला राय को हटाए जाने के पीछे बगावती सुरों को मुख्य वजह माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये दोनों नेत्रियां लोकसभा में टीएमसी के असंतुष्ट और बागी सांसदों के समूह के साथ खड़ी हो चुकी हैं। यह बागी गुट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल चुका है। खबर है कि यह समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने की तैयारी में है, ताकि वे संसद में खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता दिला सकें। बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 सांसद उनके पाले में हैं।
‘दूध और केला खाकर सांप निकले
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान पर टीएमसी के एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ये संगठनात्मक बदलाव तीन दिन पहले हुई पार्टी की बैठक में ही तय कर लिए गए थे। उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा, “ममता दीदी ने लोगों को दूध और केला देकर पाला, लेकिन वे सांप निकले।” इसी बीच, बागी गुट की वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तीदार ने एक बड़ा बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया है कि जैसे ही संसद में उनके गुट को असली टीएमसी के रूप में मान्यता मिल जाएगी, वे केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को अपना समर्थन दे सकते हैं।
पुरानी कमेटियों का विलय
इस बड़े फेरबदल की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। इससे पहले 5 जून को ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य में टीएमसी की सभी मौजूदा कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को पूरी तरह भंग कर दिया था। इसके बाद एक नई संगठनात्मक संरचना तैयार की गई, जिसमें कई पुराने चेहरों और वफादार नेताओं को फिर से मुख्यधारा में लाया गया। इसी पुनर्गठन के तहत ममता बनर्जी ने अपने भतीजे और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी थी।
सुदीप बंद्योपाध्याय की विदाई
पार्टी ने ताजा फेरबदल में कोलकाता के फायरब्रांड नेता और सांसद कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह पद पहले वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय के पास था। कुणाल घोष ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। गौरतलब है कि सुदीप बंद्योपाध्याय भी शनिवार को बागी गुट में शामिल हो गए थे। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को लोकसभा इकाई का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। मौजूदा समय में इस इकाई में केवल 8 सांसद ही ममता बनर्जी के प्रति वफादार बचे हैं।
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