ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले एक नेता को केरल पुलिस ने लंबे ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार कर लिया, जिसने अपनी पहचान छुपाने के लिए हुलिया तक बदल लिया था। गिरफ्तारी के बाद जनता के गुस्से का सामना भी करना पड़ा और उसे अंडों से हमला किया गया।
ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले एक नेता को केरल पुलिस ने लंबे ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार कर लिया, जिसने अपनी पहचान छुपाने के लिए हुलिया तक बदल लिया था। गिरफ्तारी के बाद जनता के गुस्से का सामना भी करना पड़ा और उसे अंडों से हमला किया गया।

West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजा बदलने के बाद अब पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों और भ्रष्टाचार की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। राज्य की नई कानून व्यवस्था और केंद्रीय जांच एजेंसियां मिलकर अब हर उस रसूखदार नेता पर शिकंजा कस रही हैं, जिन्होंने सत्ता के संरक्षण में कथित तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा था। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई पूर्व दिग्गज नेताओं की स्थिति जहांगीर खान जैसी ही हो चुकी है।


कभी सत्ता के गलियारों में रसूख रखने वाले और भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे रहने वाले इन नेताओं को आज आम जनता के तीव्र आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले टीएमसी के पूर्व राज्य सचिव स्वपन कुमार नंदी को केरल से गिरफ्तार कर जब हुगली लाया गया, तो उग्र जनता ने उन पर जमकर अंडे बरसाए और अपना गुस्सा जाहिर किया।

गिरफ्तारी के बाद हुगली ग्रामीण पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी स्वपन कुमार नंदी को लेकर आरामबाग पहुंची थी। जैसे ही पुलिसकर्मी सुरक्षा घेरे में नंदी को गौराहटी क्रॉसिंग से पैदल आरामबाग थाने की तरफ ले जाने लगे, वहां पहले से घात लगाए बैठे स्थानीय नागरिकों का धैर्य जवाब दे गया। लोगों ने भारी संख्या में जुटकर पूर्व टीएमसी नेता का रास्ता रोका और उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने नंदी को देखते ही उन पर अंडों की बौछार कर दी। इसी बीच भीड़ में से कुछ लोगों ने आगे बढ़कर उनके चेहरे पर कालिख पोत दी और तीखी झड़प में उनकी शर्ट तक फाड़ डाली। मौके पर हालात इतने बेकाबू हो गए कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जान और आरोपी की सुरक्षा के लिए स्वपन नंदी को सड़क पर दौड़ाकर ले जाना पड़ा। इसके बावजूद आक्रोशित भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं थी और थाने के मुख्य गेट तक उन पर लगातार अंडे फेंकती रही। उल्लेखनीय है कि स्वपन नंदी ने कानून की नजरों से बचने के लिए अपनी मूंछें मुंडवाकर हुलिया पूरी तरह बदल लिया था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उनकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई।
स्वपन कुमार नंदी की गिनती कभी आरामबाग और हुगली क्षेत्र में ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और कद्दावर नेताओं में होती थी। उन पर आरामबाग नगरपालिका के तहत साल 2017 में आई ‘ग्रीन सिटी योजना’ में करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन का मुख्य आरोप है। इस सरकारी योजना के तहत क्षेत्र के 44 स्कूलों में आधुनिक सोलर सिस्टम लगाए जाने थे, जिसके लिए भारी-भरकम बजट आवंटित हुआ था। आरोप है कि नंदी और उनके करीबियों ने स्कूलों में महज 44 लाख रुपये का ही नाममात्र का काम करवाया और बाकी की विशाल धनराशि फर्जी बिल और वाउचर बनाकर डकार गए। शुरुआती जांच के अनुसार, स्वपन नंदी पर कुल 7.24 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।

पश्चिम बंगाल में नई व्यवस्था आने के बाद अब भ्रष्टाचारियों और अवैध ‘कट मनी’ (कमीशन) वसूलने वालों के बीच जबरदस्त खौफ का माहौल है। उदाहरण के तौर पर, फालता के देवीपुर में सरकारी हाउसिंग स्कीम के नाम पर कट मनी वसूलने वाले स्थानीय प्रेसिडेंट सौमित्र मंडल अब कानूनी कार्रवाई के डर से अपने करीबियों के जरिए गरीब ग्रामीणों का पैसा चुपचाप वापस लौटा रहे हैं। राज्य में शुभेंदु सरकार के सत्ता संभालते ही पुरानी फाइलों को दोबारा खोला जा रहा है। एक तरफ जहां राज्य की पुलिस अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है, वहीं दूसरी तरफ सूबे की जागरूक जनता अदालत के फैसले से पहले ही इन दागी नेताओं का सामाजिक न्याय अंडों और कालिख से सरेआम कर रही है।
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