US Iran Agreement : पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से जारी तनाव और सैन्य गतिरोध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम की औपचारिक घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) की शाम अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए की। इस समझौते के धरातल पर उतरने के साथ ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। वैश्विक मंच पर हुए इस शांति प्रयास से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर बना दबाव अब काफी हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच इस शांति समझौते पर स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।

स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षरित होगी पीस डील
इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने और औपचारिक हस्ताक्षर के लिए स्विट्जरलैंड को चुना गया है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरान की ओर से प्रमुख राजनयिक अराघची और गालिबफ इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। समझौते की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त के तहत दोनों देश अपने-अपने सैन्य अभियानों और हमलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएंगे। इसके अलावा, इस शांति प्रस्ताव के दायरे में लेबनान और उससे जुड़े क्षेत्रीय संघर्षों को स्थायी रूप से समाप्त करने का खाका भी तैयार किया गया है, ताकि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल की जा सके।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से बनी बात
असाधारण रूप से इस बेहद जटिल और संवेदनशील शांति समझौते को कराने में पड़ोसी देश पाकिस्तान ने एक प्रमुख मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इस सफल पीस डील की आधिकारिक जानकारी दुनिया के सामने रखी। इस समझौते के क्रियान्वयन के लिए फिलहाल 60 दिनों के सीजफायर (युद्धविराम) की अवधि तय की गई है। इस तय समय सीमा के भीतर दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, फ्रीज किए गए फंड को रिलीज करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बेहद पेचीदा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। जब तक किसी अंतिम और सर्वसम्मत निर्णय पर मुहर नहीं लग जाती, तब तक के लिए यह अस्थायी व्यवस्था लागू रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलने का हुआ ऐलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि आने वाले शुक्रवार से होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से दोबारा खोल दिया जाएगा। इसके समानांतर, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने कड़े ब्लॉकेड (नौसैनिक नाकेबंदी) को भी पूरी तरह से समाप्त कर देगा। वित्तीय मोर्चे पर राहत देते हुए, समझौते के तैयार मसौदे (ड्राफ्ट) के तहत अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमत हुआ है। तय रणनीति के मुताबिक, इस कुल राशि का आधा हिस्सा यानी करीब 12 अरब डॉलर की रकम मुख्य समझौते पर दस्तखत होने से पहले ही ईरान को ट्रांसफर कर दी जाएगी। बदले में, ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह पुख्ता भरोसा देगा कि वह किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम का विस्तार पूरी तरह रोक देगा।
इजरायल में समझौते को लेकर उपजा असंतोष
इस वैश्विक समझौते में इजरायल को औपचारिक रूप से कोई पक्षकार या हिस्सेदार नहीं बनाया गया है, जिसके कारण इजरायली राजनीतिक गलियारों में इस युद्धविराम को लेकर गहरा असंतोष और चिंता देखी जा रही है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद सधे हुए शब्दों में सिर्फ इतना कहा कि वे किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। दूसरी ओर, इजरायल के विपक्षी नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की एक बहुत बड़ी नाकामी करार दिया है। बहरहाल, होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलेगी, क्योंकि दुनिया की एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।











