Dhamtari News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से अंतिम संस्कार को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। श्यामतराई गांव में 50 वर्षीय गीता बाई साहू के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों और मृतका के परिजनों के बीच विवाद खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि मृतका का परिवार एक अलग धार्मिक पंथ से जुड़ा हुआ था और अपनी मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहता था। दूसरी ओर, कुछ ग्रामीणों ने गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार को लेकर आपत्ति जताई।

शवयात्रा के रास्ते में ग्रामीणों ने लगाई बैरिकेडिंग
मिली जानकारी के मुताबिक, गीता बाई साहू के निधन के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव के मुक्तिधाम की ओर लेकर जा रहे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने रास्ते में बांस और बल्लियां लगाकर रास्ता रोक दिया। इसके चलते शवयात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। देखते ही देखते मौके पर विवाद की स्थिति बन गई और गांव में तनाव का माहौल पैदा हो गया। स्थिति को देखते हुए परिजनों ने प्रशासन और पुलिस को मामले की जानकारी दी।

पारंपरिक रीति से अंतिम संस्कार की मांग
ग्रामीणों की ओर से यह तर्क दिया गया कि गांव के मुक्तिधाम का इस्तेमाल पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है। इसी आधार पर उन्होंने मृतका के परिजनों द्वारा अलग धार्मिक मान्यता के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति बनी और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
संत रामपाल पंथ से जुड़ा था मृतका का परिवार
बताया गया है कि गीता बाई साहू का परिवार पिछले करीब 10 वर्षों से संत रामपाल पंथ से जुड़ा हुआ था। परिवार अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृतका का अंतिम संस्कार करना चाहता था। परिजनों का कहना था कि उन्हें अपनी धार्मिक परंपरा के मुताबिक अंतिम विदाई देने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर गांव में विवाद गहरा गया और कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ-साथ दोनों पक्षों से बातचीत शुरू की। ग्रामीणों और मृतका के परिजनों के साथ अलग-अलग बैठकें की गईं। प्रशासन की ओर से सभी पक्षों को शांत रहने और आपसी सहमति से समाधान निकालने की समझाइश दी गई। करीब पांच घंटे तक बातचीत और समझाइश का दौर चलता रहा।

पांच घंटे की बातचीत के बाद निकला समाधान
प्रशासन की मौजूदगी में हुई लंबी बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच समाधान पर सहमति बनी। गांव में तनाव और विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए तय किया गया कि मृतका का अंतिम संस्कार गांव की सीमा के बाहर किया जाएगा। इस फैसले के बाद परिजन शव को लेकर गांव की सीमा से बाहर गए और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
प्रशासन की मौजूदगी में शांतिपूर्ण अंतिम विदाई
समझौते के बाद प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी कराई गई। इससे गांव में बने तनाव को तत्काल नियंत्रित करने में मदद मिली। प्रशासन ने दोनों पक्षों को संयम बनाए रखने और विवाद को आगे नहीं बढ़ाने की अपील की। घटना के बाद गांव में स्थिति सामान्य होने की जानकारी सामने आई है।
धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक समन्वय पर सवाल
श्यामतराई की घटना ने अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर धार्मिक मान्यताओं और सामुदायिक सहमति के बीच संतुलन की जरूरत को सामने ला दिया है। ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि किसी परिवार की धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के बीच टकराव को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके। फिलहाल प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद विवाद समाप्त हो गया है।
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