Bihar Politics : बिहार की राजनीति में इस समय पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का ’10 सर्कुलर रोड’ स्थित सरकारी बंगला भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग द्वारा इस बंगले को खाली करने का नोटिस काफी पहले ही दिया जा चुका था। इसके बाद, जिला प्रशासन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए राबड़ी देवी को बंगला छोड़ने के लिए 15 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम जारी किया था। हालांकि, इस तय समय-सीमा के बीत जाने के बाद भी लालू परिवार ने अभी तक यह बंगला पूरी तरह से खाली नहीं किया है। अब हर किसी की नजरें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस बंगले को खाली कराने के लिए कोई सख्त कानूनी या जमीनी कार्रवाई करेगा।

अंदरखाने शुरू हुई आवास खाली करने की प्रक्रिया और सामान की शिफ्टिंग
भले ही राजनीतिक तौर पर गतिरोध बरकरार दिख रहा हो, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 10 सर्कुलर रोड वाले आवास से सामान हटाने की प्रक्रिया पिछले कुछ दिनों से चरणबद्ध तरीके से जारी है। लालू परिवार के घरेलू और अन्य सामानों को धीरे-धीरे उनके निजी ठिकानों जैसे महुआ बाग, कौटिल्य नगर और गोला रोड स्थित गौशाला परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी आने वाले कुछ ही दिनों में इस बंगले को पूरी तरह छोड़ देंगे।

जानिए क्यों खड़ा हुआ यह बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद
मई 2026 से यह बंगला एक बार फिर से बिहार की सियासत के केंद्र में आ गया है। इस पूरे विवाद के पीछे मुख्य रूप से पटना हाईकोर्ट का एक पुराना नियम और राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए तीन आधिकारिक नोटिस हैं:
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हाईकोर्ट का 2019 का ऐतिहासिक फैसला: सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई पटना उच्च न्यायालय के 2019 के उस आदेश के तहत की जा रही है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिए जाने के प्रावधान को पूरी तरह रद्द कर दिया गया था।
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पहला नोटिस (25 नवंबर 2025): नई आवासीय नीति के तहत राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते ’39, हार्डिंग रोड’ पर नया बंगला आवंटित कर पुराना आवास खाली करने को कहा गया था।
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दूसरा नोटिस (मध्य मई 2026): पुराना आवास तय समय पर खाली न होने के कारण भवन निर्माण विभाग ने लालू परिवार को एक रिमाइंडर नोटिस भेजा।
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तीसरा और अंतिम नोटिस (29 मई 2026): बिहार सरकार ने इस बंगले को एनडीए सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम के नाम आवंटित कर दिया और इसे तत्काल खाली करने का हुक्म दिया।
अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त और आरजेडी का सरकार पर पलटवार
जिला प्रशासन द्वारा दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम की अवधि 13 जून को समाप्त हो चुकी है, लेकिन बंगला अभी भी लालू परिवार के नियंत्रण में है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी है। पार्टी का आरोप है कि पटना में एनडीए के कई नेताओं और अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों के पास अब भी सरकारी बंगले मौजूद हैं। ऐसे में केवल लालू परिवार को टारगेट करना सरकार की राजनीतिक द्वेष और विरोध की नीति को दर्शाता है।
सुरक्षा कटौती का विरोध
इस पूरे विवाद के बीच, हाल ही में बिहार सरकार द्वारा लालू परिवार की सरकारी सुरक्षा में की गई कटौती के विरोध में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने अपनी पूरी सुरक्षा वापस कर दी थी। इसके बाद से बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता एकजुट होकर 10 सर्कुलर रोड आवास के बाहर डटे हुए हैं। हालांकि, लालू यादव लगातार अपने महुआ बाग वाले बंगले का जायजा ले रहे हैं और राबड़ी देवी ने भी कौटिल्य नगर स्थित आवास का निरीक्षण किया है। चर्चा है कि वे जल्द ही कौटिल्य नगर शिफ्ट हो जाएंगे। फिलहाल लालू परिवार सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है, ताकि अगर सरकार कोई जबरन कार्रवाई करती है, तो वे इसे जनता के बीच ले जाकर सियासी सहानुभूति और जनसमर्थन बटोर सकें।
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