NCPI Controversy : Trinamool Congress के बागी सांसदों द्वारा कम चर्चित राजनीतिक दल Nationalist Citizens Party of India में विलय की घोषणा के बाद पार्टी के अंदर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। NCPI के सचिव शांतनु डे ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विलय की प्रक्रिया पूरी तरह गैर-लोकतांत्रिक थी और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को भरोसे में नहीं लिया गया।

शांतनु डे ने नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
NCPI के सचिव Shantanu Dey ने पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इतने बड़े फैसले से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल में विलय जैसे बड़े निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला केवल पति-पत्नी ने मिलकर ले लिया और पार्टी के बाकी सदस्यों को नजरअंदाज कर दिया गया।शांतनु डे ने कहा कि पार्टी को त्रिपुरा में खड़ा करने के लिए जिन कार्यकर्ताओं ने मेहनत की, उन्हीं को इस अहम फैसले से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि जमीन पर काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय को महत्व नहीं देना संगठनात्मक लोकतंत्र के खिलाफ है।

NCPI प्रमुख उत्तिया कुंडू और पत्नी चर्चा में आए
इस विवाद के बाद NCPI के संस्थापक Uttiya Kundu और उनकी पत्नी Shevli Kundu भी चर्चा में आ गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह दंपति लगभग आठ साल पहले पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से हावड़ा जिले के संकराइल इलाके में आकर बस गया था।राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उत्तिया कुंडू खुद को Suvendu Adhikari का करीबी बताते हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग मिल गया है।
शेवली कुंडू ने शांतनु डे के दावों को किया खारिज
शेवली कुंडू ने शांतनु डे के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे न तो पार्टी के संस्थापक हैं और न ही महासचिव। उनका दावा है कि 2023 के बाद से शांतनु पार्टी के सदस्य भी नहीं रहे हैं। शेवली ने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और अब नए अध्यक्ष ही इस विषय पर अधिक जानकारी दे सकते हैं।
हाई कोर्ट जाने की चेतावनी
शांतनु डे ने कहा कि यदि उनके सवालों का जवाब नहीं दिया गया, तो वह Calcutta High Court और चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और विलय पूरी तरह मनमाने तरीके से किया गया।शांतनु डे ने यह भी कहा कि वह जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इस पूरे मामले से जुड़े कई अहम खुलासे करेंगे। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने वाला है।
TMC के 20 बागी सांसदों ने किया विलय का ऐलान
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब Trinamool Congress के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात कर NCPI में शामिल होने और National Democratic Alliance को समर्थन देने की घोषणा की।बागी सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने कहा कि TMC के दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था के लिए स्पीकर को पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा कि सभी सांसद NCPI में विलय कर NDA का समर्थन करेंगे।
NCPI की राजनीतिक मौजूदगी फिलहाल सीमित
शांतनु डे ने बताया कि NCPI की सक्रियता मुख्य रूप से त्रिपुरा तक सीमित रही है। पश्चिम बंगाल में पार्टी की मौजूदगी नाममात्र की रही है। हालांकि पार्टी को 2023 में पश्चिम बंगाल में पंजीकृत किया गया था, लेकिन अब तक वहां कोई बड़ा राजनीतिक प्रभाव नहीं दिखा।चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में केवल तीन सीटों—अंबासा, चावामनु और कैलाशहर—पर चुनाव लड़ा था। इसके अलावा करमचारा सीट पर उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था।
राष्ट्रीय राजनीति में अचानक चर्चा का केंद्र बनी NCPI
TMC सांसदों के विलय और उसके बाद पार्टी के अंदरूनी विरोध ने NCPI को अचानक राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक प्रयोग कितना सफल होता है और क्या पार्टी के भीतर के मतभेद इस विलय को प्रभावित करेंगे।











