क्या दुधावा के घने जंगलों में एक आदमखोर तेंदुआ लगातार ग्रामीण इलाकों के लिए खतरा बनता जा रहा है? हालिया घटनाओं के बाद गांवों में भारी दहशत फैल गई है, लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और वन विभाग की टीमें तेंदुए की तलाश में जुटी हैं।
क्या दुधावा के घने जंगलों में एक आदमखोर तेंदुआ लगातार ग्रामीण इलाकों के लिए खतरा बनता जा रहा है? हालिया घटनाओं के बाद गांवों में भारी दहशत फैल गई है, लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और वन विभाग की टीमें तेंदुए की तलाश में जुटी हैं।

Leopard Attack : छत्तीसगढ़ के सरोना वन परिक्षेत्र के दुधावा इलाके में एक आदमखोर तेंदुए की वापसी ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से यह तेंदुआ लगातार इंसानी बस्तियों को निशाना बना रहा है, जिससे समूचे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। केवल पांच दिनों के भीतर, गट्टागुड़ूम गांव में इस खूंखार जानवर ने तीन लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया है। तेंदुए की बढ़ती धमक और घरों के भीतर घुसने की घटनाओं ने ग्रामीणों को अंदर से झकझोर कर रख दिया है। लोग अब सूर्यास्त के बाद अपने घरों से निकलने में भी डर रहे हैं और वन विभाग से तत्काल सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

तेंदुए का खौफ इस कदर है कि लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों और वन रक्षक मुन्ना शोरी ने ग्रामीणों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और सतर्क रहें। गट्टागुड़ूम गांव में 17 जून को सुबह चार बजे तेंदुआ धनेश कुंजाम (57) के घर में घुस आया और उन पर हमला कर दिया। इससे पहले, इसी तेंदुए ने घर में सो रही 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला बुधन उइके को अपना शिकार बनाने की कोशिश की थी। महिला ने जैसे-तैसे शोर मचाकर अपनी जान बचाई। यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता; पिछले 22 दिनों के भीतर यह तेंदुआ दुधावा इलाके में एक ग्रामीण की जान ले चुका है।

तेंदुए के हमले में घायल धनेश कुंजाम ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “मैं सुबह चार बजे आंगन में खाट पर लेटा था, तभी अचानक तेंदुए ने मुझ पर झपट्टा मारा। उसने मेरा हाथ दबोच लिया, जिसे मैंने जोर का झटका देकर छुड़ाया। वह फिर से गुर्राते हुए मुझ पर हमला करने वाला था, लेकिन सौभाग्य से मेरे पास एक लाठी थी। मैंने उसे तुरंत लपका और तेंदुए पर वार किया, जिससे वह पीछे हट गया। यदि वह लाठी मेरे हाथ में न होती, तो शायद आज मैं जीवित न होता।” यह घटना स्पष्ट करती है कि यह तेंदुआ अब काफी आक्रामक हो चुका है और वह इंसानों को अपना शिकार मानकर उन पर लगातार हमला कर रहा है।
विशेषज्ञों और वन विभाग का मानना है कि यह वही आदमखोर तेंदुआ है, जिसने 26 मई को कोरमुड़ गांव के चौथराम मंडावी (55) को उठाकर पहाड़ी पर ले जाकर मार डाला था। उस घटना में मृतक का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत पाया गया था। इसके अलावा, अगस्त 2024 में इसी क्षेत्र में चार साल के मासूम बच्चे को उठाकर ले जाने और उसे मारकर खा लेने की घटना ने इलाके को पहले ही हिलाकर रख दिया था। इन पुरानी घटनाओं के बाद अब गट्टागुड़ूम में हुई ताजा हमले की घटनाओं ने आदमखोर तेंदुए के सक्रिय होने की पुष्टि कर दी है। ग्रामीण अब वन विभाग से इसे पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि इस खौफ को खत्म किया जा सके।
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