Donald Trump : ओमान के तट के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए एक सैन्य हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव पैदा कर दिया है। इस हमले में ‘एमटी सेटेबेलो’ नामक एक वाणिज्यिक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिसमें सवार तीन भारतीय नाविकों की असामयिक मृत्यु हो गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इन जहाजों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन किया गया था। इस घटना के बाद से भारत में गहरा आक्रोश है, और सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। भारत ने तीन दिनों के भीतर दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

मोदी-ट्रंप वार्ता: समुद्री सुरक्षा और नाविकों के संरक्षण पर जोर
फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। लगभग 16 महीने बाद हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते में समुद्री नाविकों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रावधान होने चाहिए। दोनों नेताओं ने पिछले एक वर्षों से तनावपूर्ण चल रहे द्विपक्षीय संबंधों को पुनः पटरी पर लाने और आपसी भरोसे को बहाल करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के साथ एक अत्यंत तनावपूर्ण बातचीत में भारतीय नाविकों की मौत पर अपना कड़ा विरोध प्रकट किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख और कूटनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख चर्चा का विषय बना रहा। जब उनसे भारतीय नाविकों की मौत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे ‘हमेशा से होता रहा’ एक सामान्य घटना के रूप में वर्णित किया, जिस पर उन्होंने कोई स्पष्ट शोक या अफसोस व्यक्त नहीं किया। ट्रंप ने वाणिज्यिक जहाजों के संचालन को एक चुनौतीपूर्ण कार्य बताया और कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली इस मुद्दे पर मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने भारतीय लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भारत को एक भरोसेमंद साझेदार करार दिया और आश्वासन दिया कि अमेरिका भारत की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
भविष्य की राह: शांति समझौते में नाविकों की सुरक्षा का संकल्प
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति में क्षेत्रीय स्थिरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारतीय सरकार का स्पष्ट मानना है कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों और नाविकों का जीवन सुरक्षित रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद, अब कूटनीतिक स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली भावी शांति वार्ताओं में वाणिज्यिक जहाजों और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। भारत की कूटनीतिक सक्रियता यह संदेश देती है कि वह अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए किसी भी मंच पर समझौता नहीं करेगा। अब देखना यह है कि ट्रंप प्रशासन इस घटना के बाद नाविकों की सुरक्षा के लिए भविष्य में क्या ठोस कदम उठाता है।
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