Pakistan Gurdwara Murder : पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ मरदान के बाबू मोहल्ला स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर अज्ञात हमलावरों ने एक बुजुर्ग सिख दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतकों की पहचान जगन्नाथ और उनकी पत्नी आसमा वंती के रूप में हुई है। पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित इस गुरुद्वारे में हुई इस दोहरी हत्या ने पूरे सिख समुदाय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा रोष उत्पन्न कर दिया है। मरदान के जिला पुलिस अधिकारी मसूद अहमद के अनुसार, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए, जिससे इलाके में अल्पसंख्यकों के बीच दहशत का माहौल है।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने पाकिस्तान सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान में सिख पहले से ही बेहद सीमित संख्या में हैं और उन्हें इस तरह निशाना बनाना अल्पसंख्यक उत्पीड़न का एक अत्यंत गंभीर मामला है। जत्थेदार गड़गज ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल खान अफरीदी से मांग की है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें। उन्होंने जोर दिया कि जिस स्थान पर मानवता की भलाई के लिए रोजाना अरदास की जाती है, वहां इस तरह का रक्तपात मानवता के विरुद्ध एक अक्षम्य कृत्य है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग: तरुण चुघ का तीखा प्रहार
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे ‘बर्बर और बेहद विचलित करने वाली’ घटना करार देते हुए पाकिस्तान सरकार की नाकामी को उजागर किया है। चुघ ने सवाल उठाया कि क्या यह अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए प्रायोजित आतंकवाद है? उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि पाकिस्तान सरकार को अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर किया जा सके। चुघ ने कहा कि ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के जीवन और उनकी सुरक्षा को लेकर वहां का प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है।
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और न्याय की पुरजोर मांग
जत्थेदार गड़गज और तरुण चुघ दोनों ने एक सुर में कहा है कि पाकिस्तान सरकार को इस हत्या के पीछे के असली मकसद का पारदर्शी तरीके से खुलासा करना चाहिए। चुघ ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होती और उन्हें कठोर सजा नहीं दिलाई जाती, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ है। यह हमला पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा का जो भाव पैदा कर रहा है, उसे दूर करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से वहां के शासन तंत्र की है।
शोक और प्रार्थना: पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना
इस कठिन घड़ी में, अकाल तख्त के जत्थेदार ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ‘अकाल पुरख’ के चरणों में अरदास की है। उन्होंने समुदाय के लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है, जबकि भारतीय नेताओं ने पाकिस्तान सरकार को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे इस तरह के अत्याचारों को अब और अधिक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान में सुरक्षा और न्याय प्रदान करने की सरकारी विफलता को इस घटना ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर चर्चा का विषय बना दिया है।
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