Ram Mandir Donation : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी के आरोपों को लेकर छिड़े विवाद के बीच, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक महत्वपूर्ण साक्षात्कार में कई गंभीर पहलुओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) वर्तमान में गहन जांच कर रही है। जब उनसे यह तीखा सवाल किया गया कि स्पष्ट आरोपों के बावजूद अब तक एफआईआर (FIR) क्यों दर्ज नहीं की गई है, तो मिश्रा ने कहा कि श्रद्धालु भी यह जानना चाहते हैं। उनके अनुसार, यदि ट्रस्ट ने मामले की शुरुआती जानकारी मिलते ही जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज कराई होती, तो वह अधूरी होती। यह भी स्पष्ट नहीं था कि एफआईआर में किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम दर्ज किया जाए या इसे ‘अज्ञात’ के खिलाफ रखा जाए।

न्यायिक जांच बनाम एसआईटी जांच: प्रक्रिया और लाभ
नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच का तरीका चयन के पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी। उन्होंने बताया कि यदि इस मामले में न्यायिक जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती, तो केवल शुरुआत करने में ही तीन महीने का समय लग सकता था। वहीं, एसआईटी जांच के माध्यम से यह लाभ है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे सीधे एफआईआर में परिवर्तित किया जा सकता है, जो कि कानूनी प्रक्रिया के दायरे में ही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि सामान्य पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाती, तो बार-बार सप्लीमेंट्री एफआईआर दर्ज करने की जटिलता उत्पन्न होती। अब उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच अधिक विश्वसनीय और व्यापक परिणामों वाली होगी।

मंदिर परिसर की सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी की हकीकत
मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मिश्रा ने कहा कि परिसर में लगभग 800 सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं और एक समर्पित कंट्रोल रूम भी मौजूद है, जिसकी देखरेख पुलिस करती है। हालांकि, उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इन सीसीटीवी कैमरों का उपयोग सही तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि दान पेटी के पास लगे सीसीटीवी से ही चोरी की घटनाओं का पता चला है, तो इसका अर्थ यही है कि निगरानी व्यवस्था कहीं न कहीं से प्रभावित हुई है और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने सुरक्षा को या तो ‘लचर’ बताया या फिर प्रभावी निगरानी का अभाव कहा।
दान प्रबंधन में जवाबदेही और सख्त नियमों का पालन
दान राशि के प्रबंधन को लेकर उन्होंने कड़े रुख अपनाते हुए कहा कि अब सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय कर दी गई हैं। बैंक से लेकर ट्रस्ट तक, प्रत्येक स्तर पर प्रोटोकॉल निर्धारित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दान की गिनती के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत कड़े निर्देश दिए गए हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि गिनती प्रक्रिया में शामिल कर्मियों के कपड़ों में जेब नहीं होनी चाहिए। नृपेंद्र मिश्रा का यह बयान स्पष्ट करता है कि मंदिर प्रशासन अब भविष्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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