Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) के बाद अब होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी आधिकारिक तौर पर हटा ली गई है। पिछले 66 दिनों से जारी इस कड़े सैन्य प्रतिबंध के हटने को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, नाकेबंदी खत्म होने के बावजूद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि उनके नौसैनिक जहाज अभी भी उस इलाके में अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगे। कमांड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शांति समझौते की शर्तों का पालन पूरी ईमानदारी से हो रहा है और क्षेत्र में शांति बहाली की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहे। यह तैनाती किसी आक्रामकता के लिए नहीं, बल्कि समझौते की निगरानी और सुरक्षा के लिए है।

राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा संदेश: ‘अमेरिका शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध’
इस शांतिपूर्ण बदलाव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका वैश्विक शांति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने मध्य-पूर्व के सभी पक्षों से अपील की है कि वे शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के संकल्प पर कायम रहें। ट्रंप ने कहा, “हम क्षेत्र के सभी लोगों से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के वादे पर बने रहने की उम्मीद करते हैं।” उनके इस बयान के पीछे की खुशी बाजारों में भी साफ देखी जा रही है; तेल की गिरती कीमतें और शेयर बाजार में आती तेजी यह संकेत दे रही है कि दुनिया ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है। ट्रंप ने लेबनान, हिज्बुल्लाह और इजरायल समेत सभी मोर्चों पर पूर्ण और स्थायी युद्धविराम की उम्मीद जताई है।

13 अप्रैल से जारी थी तनावपूर्ण नाकेबंदी की स्थिति
होर्मुज स्ट्रेट की यह नाकेबंदी अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे एक लंबा सैन्य संघर्ष था। तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हमला किया था। इस जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस कदम के जवाब में अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी कर दी, जिससे वहां से जहाजों की आवाजाही लगभग असंभव हो गई थी। 13 अप्रैल से शुरू हुआ यह संघर्ष व्यापारिक और सैन्य दृष्टि से दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ था, लेकिन अब एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद 66 दिनों का यह संकट आखिरकार समाप्त हो गया है।
भू-राजनीतिक मोड़: शांति से वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
अमेरिका-ईरान के बीच का यह समझौता केवल दो देशों का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम है। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना तेल की वैश्विक आपूर्ति शृंखला को सुचारू बनाएगा, जिससे ईंधन की कीमतों में कमी आएगी और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना है। यदि लेबनान और इजरायल जैसे मोर्चों पर भी ट्रंप की उम्मीद के अनुसार युद्धविराम प्रभावी रहता है, तो पूरे पश्चिम एशिया में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बदलाव को उम्मीद की नजरों से देख रहा है, क्योंकि शांति का हर एक कदम न केवल क्षेत्रीय राजनीति को स्थिर करेगा, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी सकारात्मक लहर पैदा करेगा।
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