राज्यसभा चुनाव में 19 सीटों पर जीत के बाद मोदी सरकार का ऊपरी सदन में गणित और मजबूत हो गया है। अब सरकार दो-तिहाई बहुमत के करीब मानी जा रही है। इस बदलाव से विधायी फैसलों पर असर पड़ेगा और विपक्ष के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
राज्यसभा चुनाव में 19 सीटों पर जीत के बाद मोदी सरकार का ऊपरी सदन में गणित और मजबूत हो गया है। अब सरकार दो-तिहाई बहुमत के करीब मानी जा रही है। इस बदलाव से विधायी फैसलों पर असर पड़ेगा और विपक्ष के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

Rajya Sabha : राज्यसभा की 26 सीटों पर हुए हालिया चुनावों के बाद उच्च सदन में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। चुनावों के इन नतीजों ने एनडीए को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जहां अब गठबंधन की कुल सीटों की संख्या 150 तक पहुंच गई है। भारतीय संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर है जब एनडीए ने उच्च सदन में 150 का जादुई आंकड़ा हासिल किया है। संसद के उच्च सदन में कुल 245 सीटें हैं, जिसके अनुसार दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा 163 है। इस तरह, एनडीए अब अपने लक्ष्य से केवल 13 सीटें दूर रह गया है। यह पहली बार है जब एनडीए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की दिशा में इतनी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

हालिया राज्यसभा चुनावों में एनडीए ने कुल 26 में से 19 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला ‘इंडिया’ गठबंधन महज 6 सीटों पर सिमट कर रह गया है। इसके अलावा, एक सीट मिजोरम की क्षेत्रीय पार्टी ‘जोरम पीपल्स मूवमेंट’ (ZPM) के खाते में गई है। इन चुनावों से पहले एनडीए के पास 148 सांसद थे, जिसमें अब दो सीटों का इजाफा हो गया है। झारखंड की एक महत्वपूर्ण सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत ने विपक्ष की रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस परिणाम ने न केवल संख्या बल में फेरबदल किया है, बल्कि विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी सामंजस्य को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के परिणाम ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रहे। गठबंधन के भीतर मचे घमासान के कारण कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस का आरोप है कि आरजेडी और सीपीआई-एमएल के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे पार्टी का उम्मीदवार पराजित हो गया। वहीं, जवाब में आरजेडी और सीपीआई-एमएल ने कांग्रेस को आत्मचिंतन करने की सलाह दी है। झारखंड की दोनों सीटों को ‘सुरक्षित’ मानकर चल रहा गठबंधन अब हार के लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन के भीतर का अति-आत्मविश्वास और तालमेल की कमी ही इस हार की मुख्य वजह बनी।
इन राज्यसभा चुनावों ने भारतीय संसद में एक नया अध्याय भी जोड़ा है। मिजोरम की क्षेत्रीय पार्टी ‘जोरम पीपल्स मूवमेंट’ (ZPM) को पहली बार राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। पार्टी के उम्मीदवार के. लाल्टलुआंगकिमा के उच्च सदन में पहुंचने से क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले 11 जून को ही 24 सीटों का परिणाम घोषित कर दिया गया था, जहां चुनाव की नौबत ही नहीं आई और सभी 24 सांसद सर्वसम्मति से चुने गए थे। उन 24 सीटों में से 19 पर एनडीए और 5 पर विपक्ष ने जीत दर्ज की थी। यह चुनाव भविष्य की राजनीति में एनडीए के बढ़ते प्रभाव और विपक्ष के बिखरते एकजुटता के प्रयासों को दर्शाता है।
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