Uniform Civil Code : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में इसे लागू करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इस दिशा में सरकार ने अध्ययन और सुझावों के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन भी कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि कमेटी मानसून सत्र तक अपना कार्य पूरा कर सकती है। उत्तराखंड में UCC के सफल कार्यान्वयन के बाद, छत्तीसगढ़ अब इसे अपनाकर देश के चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल होने के लिए तत्पर दिख रहा है। यह कदम राज्य की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और इसके मायने?
समान नागरिक संहिता का सरल अर्थ है—’एक देश, एक कानून’। यह एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो धर्म, जाति या समुदाय से परे सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, संपत्ति के अधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम सुनिश्चित करता है। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन UCC के आने से इन सभी व्यक्तिगत कानूनों का स्थान एक एकीकृत कानून ले लेगा। यह कानून लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और समाज में न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, ताकि हर नागरिक को उनके अधिकारों के प्रति समान संरक्षण प्राप्त हो सके।

UCC के संभावित प्रभाव: समाज में आएंगे व्यापक बदलाव
यदि छत्तीसगढ़ में UCC लागू होता है, तो समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके तहत सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक की प्रक्रिया एक समान हो सकती है। इसके अलावा, बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगने और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की प्रबल संभावना है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव विरासत और संपत्ति के अधिकारों में देखने को मिल सकते हैं, जहाँ बेटियों को पिता की संपत्ति में समान और स्पष्ट अधिकार देने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। गोद लेने की प्रक्रिया में भी सरलता और समानता आएगी, जिससे सभी समुदायों के लिए एक ही प्रकार की कानूनी प्रक्रिया मान्य होगी।
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेष कमेटी
छत्तीसगढ़ में UCC का मसौदा तैयार करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उन्हें शादी, तलाक, संपत्ति और गोद लेने जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यापक अध्ययन कर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि कमेटी के अन्य सदस्यों के नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सदस्यों के चयन के लिए अधिकृत किया गया है। अप्रैल 2026 में कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी और अब सरकार इसे मानसून सत्र तक अंतिम रूप देने के प्रयास में है।
देश के अन्य राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ की बढ़ती राह
भारत में गोवा लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक संहिता का पालन कर रहा है, जबकि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना जिसने जनवरी 2025 में इसे सफलतापूर्वक लागू किया। गुजरात में भी UCC विधेयक पारित हो चुका है, वहीं मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्य भी इसे लागू करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। अब छत्तीसगढ़ भी इसी कड़ी में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार इसे लेकर अत्यंत गंभीर है और मानसून सत्र में एक बड़ा विधायी निर्णय सामने आ सकता है।
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