Ammonia Gas Leak : तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के पेरियापालयम के निकट मंजांगरानाई गांव में स्थित एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस के रिसाव ने भीषण त्रासदी का रूप ले लिया है। इस हृदयविदारक घटना में अब तक सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है। गैस के रिसाव के तुरंत बाद फैक्ट्री में काम कर रहे दर्जनों कर्मचारी दम घुटने और बेहोशी की चपेट में आ गए। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से एंबुलेंस के जरिए नजदीकी मेडिकल सेंटरों और अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया, जहां अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।

एनडीआरएफ की विशेष टीम द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही तिरुवल्लूर जिला कलेक्टर कार्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अरक्कोणम स्थित नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की चौथी बटालियन को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीनियर कमांडेंट अखिलेश कुमार के निर्देश पर केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) बचाव कार्यों में दक्ष एक विशेष टीम को चेन्नई से घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। 30 सदस्यों की यह विशेष टीम आवश्यक पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE), गैस डिटेक्टर और अत्याधुनिक बचाव उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया।

पीड़ितों का अस्पताल में चल रहा इलाज
तिरुवल्लूर की जिला कलेक्टर एस. कविता ने घटना के बाद राहत कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि कुल 67 प्रभावित कर्मचारियों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 46 लोगों का इलाज वेल्स हॉस्पिटल और 21 लोगों का उपचार वेंकटेश्वर हॉस्पिटल में किया जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार 9 मरीजों को चेन्नई के सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। स्थानीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर डालें तो एक निजी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि भर्ती किए गए 44 मरीजों में से अधिकांश 24-25 वर्ष की युवतियां हैं। गंभीर रूप से बीमार 11 मरीज वर्तमान में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, और डॉक्टर उनके स्वास्थ्य पर निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं।
प्रशासन द्वारा जांच के आदेश और सुरक्षा में चूक की आशंका
इस भीषण हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के प्रति सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर एस. कविता ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का अवलोकन किया और अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। शुरुआती जांच में फैक्ट्री के वॉल्व में खराबी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। इस संभावित लापरवाही और सुरक्षा चूक की गहन जांच के लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह हादसा सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा और गैस रिसाव रोकने की प्रणालियों पर बड़े सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। फिलहाल बचाव कार्य जारी है और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है।










