Ranchi Protest: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों तथा राज्य सरकार के बीच बातचीत शुरू हो गई है। गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार की ओर से मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल और अभ्यर्थियों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच पहले दौर की वार्ता हुई। छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने विस्तार से रखा।

सरकार ने मांगों को बताया संवेदनशील और जायज
बैठक के दौरान राज्य सरकार के मंत्रियों ने अभ्यर्थियों की मांगों को संवेदनशील और जायज बताया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक सरकार उनकी मांगों पर निश्चित समय-सीमा के साथ लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव का कार्यक्रम फिलहाल वापस नहीं लिया गया है।

मंत्री दीपिका पांडेय ने समाधान का दिया भरोसा
बैठक के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और समाधान निकालने के लिए प्रशासन सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों ने अपनी मांगें बैठक में विस्तार से रखी हैं। सरकार ने कुछ मुद्दों पर छात्रों से लिखित मसौदा भी मांगा है, जिसे जल्द उपलब्ध कराने की उम्मीद है। मंत्री के अनुसार, छात्रों की समस्याओं से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अवगत करा दिया गया है और सरकार सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने भी संवाद का दिया संकेत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी आंदोलनकारी अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार छात्रों की समस्याओं को समझना चाहती है और जरूरी सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की ओर से संवाद का यह प्रयास ऐसे समय हुआ है, जब अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
परीक्षाएं रद्द करने की पहली बड़ी मांग
बैठक में छात्र प्रतिनिधियों रवींद्र पासवान और पीयूष कुमार ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट किया। अभ्यर्थियों की पहली मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की है। छात्रों ने JSSC CGL, TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं और अभय तिवारी से जुड़े विवादित परीक्षा मामलों को रद्द करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होने तक इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल बना रहेगा।

CBI और ED से संयुक्त जांच की मांग
अभ्यर्थियों की दूसरी प्रमुख मांग भर्ती घोटालों और कथित पेपर लीक मामलों की स्वतंत्र जांच से जुड़ी है। छात्र प्रतिनिधियों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से संयुक्त जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल करने और दोषियों की पहचान करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों से जांच आवश्यक है।
JPSC और JSSC में स्थायी सुधार की मांग
छात्रों की तीसरी प्रमुख मांग दोनों भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की है। अभ्यर्थी JPSC और JSSC की संरचना, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शी एवं दीर्घकालिक बदलाव चाहते हैं। उनका कहना है कि केवल मौजूदा विवाद का समाधान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी शिकायतों और अनियमितताओं को रोकने के लिए व्यवस्था में स्थायी सुधार जरूरी है।
आंदोलन में ‘टूलकिट’ के आरोप पर छात्रों की आपत्ति
वार्ता के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से आंदोलन में असामाजिक या कथित देशविरोधी तत्वों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई। इस पर छात्र प्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह अनुशासित है और इसमें किसी भी तरह के देशविरोधी तत्व या ‘टूलकिट’ का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों ने भी आंदोलन के अनुशासन की सराहना की है।
दूसरे दौर की वार्ता आज सुबह होगी
छात्र प्रतिनिधि राजेश प्रसाद के मुताबिक, सरकार और अभ्यर्थियों के बीच पहले से मौजूद संवाद की कमी बैठक के बाद कुछ हद तक दूर हुई है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जब तक 10 अगस्त से पहले मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। विधानसभा घेराव का कार्यक्रम भी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार होगा। दूसरे दौर की वार्ता शनिवार सुबह 10 बजे प्रस्तावित है, जिससे दोनों पक्षों के बीच समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं।
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