Maharashtra Politics : शिवसेना में पिछले चार वर्षों में दूसरी बार आई फूट के बाद, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने के लिए उत्तर पूर्वी मुंबई का दौरा शुरू किया है। इस दौरान भांडुप में आयोजित एक सभा में उद्धव ठाकरे भावुक नजर आए। उन्होंने वहां मौजूद पुराने शिवसैनिकों और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। ठाकरे ने कहा कि जिन भी निर्वाचन क्षेत्रों में उनके उम्मीदवारों के साथ विश्वासघात हुआ है, वहां के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के सामने वे खुद जाकर माफी मांगेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे उन्हें केवल शिवसैनिक नहीं, बल्कि ‘प्रज्वलित मशालें’ मानते हैं, जिन्होंने पार्टी के कठिन समय में मशाल (चुनाव चिन्ह) को फिर से चमकाया है।

गलत चुनाव का दर्द और राजनीतिक पश्चाताप
उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी में हुई बगावत और चुनावों में मिली हार के लिए जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि पिछले चुनावों में उन्होंने जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया था, वे पार्टी की विचारधारा पर खरे नहीं उतरे। ठाकरे ने कहा, “मैंने उम्मीदवार चुना था, इसलिए गलती मेरी है। मैं इसके लिए आपसे माफी मांगता हूं।” उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मशाल और पार्टी के प्रति अपना समर्पण दिखाया है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में उनसे चूक हुई। उन्होंने अपने अगले कदमों का संकेत देते हुए कहा कि वे उन सभी स्थानों का दौरा करेंगे जहां पार्टी के साथ धोखा हुआ है।

भाजपा पर सीधा हमला: शिवसेना को खत्म करने का आरोप
भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को लंबे समय से तोड़ा जा रहा है और उसे कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उन लोगों को गोद लेकर पाला-पोसा है, जो पहले कभी भाजपा को ही ‘जमानत जब्त कराने वाली’ और ‘किराया वसूलने वाली’ पार्टी कहा करते थे। ठाकरे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा दूसरी पार्टियों को तोड़कर अपनी नींव मजबूत कर रही है। उन्होंने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने या उसे तोड़ने की कोशिश नहीं की, जबकि भाजपा का एकमात्र लक्ष्य शिवसेना को मिटाना है।
शिवसेना की स्वायत्तता और बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा
उद्धव ठाकरे ने हाल ही में सोलापुर में आए एक ‘बाहरी नेता’ (बिना नाम लिए) के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिवसेना बालासाहेब ठाकरे की विरासत है और इसका अध्यक्ष केवल एक ही हो सकता है, जिसे शिवसैनिक चुनते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी ‘बाहरी व्यक्ति’ यह तय नहीं कर सकता कि शिवसेना का मुखिया कौन होगा। ठाकरे ने कहा कि शिवसेना का गठन मराठी जनता के न्याय के लिए हुआ था और बाहरी ताकतें इस पर अधिकार नहीं जता सकतीं। उन्होंने अपनी सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें किसी सरकारी तामझाम की जरूरत नहीं, उन्हें केवल जनता का आशीर्वाद प्राप्त है।
क्या भाजपा अपनी नींव की मजबूती को समझ पाएगी?
सभा के अंत में, उद्धव ठाकरे ने भाजपा को चुनौती दी कि वे दूसरों के सांसदों को तोड़कर अपनी नींव मजबूत करने का जो सपना देख रहे हैं, वह खोखला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को पहले खुद यह देखना चाहिए कि क्या उनकी नींव में कोई जड़ है या वे केवल दूसरों की मेहनत पर टिकी हुई है। ठाकरे का यह दौरा पूरी तरह से आक्रामक है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं के भीतर नया जोश भरना और सहानुभूति बटोरना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी यह ‘माफी यात्रा’ उन्हें और शिवसेना (यूबीटी) को कितनी मजबूती प्रदान करती है।
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