Iran US Talks : स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च-स्तरीय शांति वार्ता के दौरान उस समय गंभीर संकट उत्पन्न हो गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक विवादास्पद बयान जारी किया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर धमकी दी कि यदि ईरान ने अपने प्रॉक्सी गुट, विशेषकर हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पहले से कहीं अधिक विनाशकारी हमला करेगा। इस धमकी ने वार्ता के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। इस अपमानजनक भाषा पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने न केवल कड़ा ऐतराज जताया, बल्कि विरोध स्वरूप मीटिंग हॉल से बाहर (वॉक आउट) भी निकल गया। हालांकि मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों ने उन्हें मनाने की भरसक कोशिश की, लेकिन फिलहाल सफलता हाथ नहीं लगी है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का तीखा पलटवार
ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए ईरान की नेशनल असेंबली के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी धमकियां वास्तव में असरदार होतीं, तो आज वॉशिंगटन की स्थिति ऐसी नहीं होती। उन्होंने अमेरिकी नेताओं को चेतावनी दी कि वे अपने बयानों में संयम बरतें, अन्यथा ईरान की सेना उन्हें कार्रवाई के माध्यम से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। वार्ताकार ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी प्रकार के अपमान या दमन के आगे झुकने वाला नहीं है।

पहले दौर की वार्ता: उम्मीद और चुनौतियां
मीटिंग हॉल से बाहर निकलने के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच करीब 82 मिनट तक बातचीत हुई। इस पहले दौर में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्ति को वापस पाने और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की मांग प्रमुखता से रखी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, प्रतिबंधों में राहत देने के लिए एक ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया गया है, जिसके तहत कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर वापस किए जाएंगे। वहीं, अमेरिका की ओर से वार्ता का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने पुराने गिले-शिकवे मिटाने की इच्छा जताई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित एमओयू (MOU) के अनुसार, परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों के भीतर किसी ठोस समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
ईरान का सख्त रुख और भविष्य की अनिश्चितता
शांति वार्ता का भविष्य अब अधर में लटका हुआ है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, ट्रंप के बयान ने बातचीत को एक बहुत ही कठिन दौर में पहुंचा दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी दोटूक कहा है कि ईरान अपने परमाणु विकास के अधिकार के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी मध्यस्थों के संपर्क में है और बातचीत से पूरी तरह पीछे हटने का औपचारिक संकेत नहीं दिया है। वहीं, इस बीच इज़रायल ने यह घोषणा कर स्थिति को और जटिल बना दिया है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के ब्यू-फोर्ट कॉसल से नहीं हटेगी। अब देखना यह है कि क्या अमेरिका और ईरान अपने कूटनीतिक मतभेदों को सुलझाकर बातचीत का अगला दौर शुरू कर पाएंगे या यह शांति प्रयास विफल हो जाएंगे।
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