Navya Malik Case : रायपुर के बहुचर्चित ड्रग्स कांड में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आधिकारिक रूप से अपनी एंट्री दर्ज करा ली है। पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट पेश किए जाने के बाद, केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और केस डायरी को तलब किया है। यह कदम संकेत देता है कि अब ड्रग्स तस्करी की जांच केवल नारकोटिक्स तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे छिपे आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के जटिल जाल की भी गहन पड़ताल की जाएगी। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य इस नेटवर्क के माध्यम से अर्जित की गई अवैध आय और उसके निवेश के स्रोतों का पता लगाना है।

काले धन और मनी ट्रेल पर ईडी का विशेष फोकस
ईडी की टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि कथित ड्रग्स व्यापार से कमाई गई काली कमाई को किन-किन रास्तों से सफेद किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से अर्जित धन को विभिन्न व्यवसायों और संपत्तियों में खपाया गया हो सकता है। यदि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस सबूत मिलते हैं, तो ईडी द्वारा कानून के तहत संबंधित आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने और बड़ी कानूनी कार्रवाई करने की पूरी संभावना है। वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल के लिए एजेंसी कई स्तरों पर डेटा का विश्लेषण कर रही है।

अगस्त 2025 में हुआ था ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश
यह मामला 23 अगस्त 2025 को पहली बार सुर्खियों में आया था, जब स्थानीय पुलिस ने हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया को एमडीएमए जैसे घातक ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों से हुई पूछताछ में ही नाव्या मलिक का नाम मुख्य कड़ी के रूप में सामने आया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुंबई से नाव्या को गिरफ्तार किया। रायपुर के कटोरा तालाब की निवासी नाव्या पर आरोप है कि वह हाई-प्रोफाइल पार्टियों और निजी आयोजनों में ड्रग्स सप्लाई करने वाले एक बड़े नेटवर्क को संचालित कर रही थी।
एनक्रिप्टेड एप्स और डिजिटल नेटवर्क का उपयोग
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह पूरा ड्रग्स रैकेट अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित था। आरोपी अपने नेटवर्क को चलाने के लिए सामान्य कॉल्स के बजाय एनक्रिप्टेड मोबाइल एप्लीकेशंस का इस्तेमाल करते थे। ऑर्डर्स लेने से लेकर डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यमों से होती थी, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए इसे ट्रैक करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। समय के साथ, यह नेटवर्क शहर के धनाढ्य और प्रभावशाली वर्ग तक गहरी पैठ बना चुका था।
850 संपर्कों का डेटा और भविष्य की चुनौतियां
पुलिस की छानबीन के दौरान नाव्या मलिक के मोबाइल फोन से 850 से अधिक संपर्कों का विवरण मिला था, जिनमें कई प्रतिष्ठित कारोबारी, होटल संचालक और प्रभावशाली व्यक्ति शामिल हैं। अब तक इस पूरे प्रकरण में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें अयान परवेज, विधि अग्रवाल, ऋषिराज टंडन, सोहेल खान और जुनैद अख्तर भी शामिल हैं। हालांकि, सभी आरोपी वर्तमान में हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर हैं, लेकिन ईडी की एंट्री के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उम्मीद है कि आगामी दिनों में इस ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग केस में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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