Shiv Sena UBT : लोकसभा में अपने सांसदों की संख्या घटने के झटकों से जूझ रही शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सामने अब एक और बड़ा संवैधानिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि स्पीकर द्वारा इस विलय को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल जाती है, तो शिवसेना यूबीटी के पास लोकसभा में केवल चार सांसद ही शेष बचेंगे। संसदीय परंपराओं के अनुसार, संसद भवन परिसर में किसी भी राजनीतिक दल को अपना आधिकारिक कार्यालय आवंटित करने के लिए कम से कम पांच सांसदों की संख्या अनिवार्य होती है। सांसदों की यह कमी पार्टी के लिए केवल संख्याबल का नुकसान नहीं, बल्कि संसद में उनकी उपस्थिति और पहुंच के मामले में भी बड़ा झटका साबित होगी।

सर्वदलीय बैठकों में भागीदारी पर गहराया संकट
सांसदों की संख्या पांच से कम होने का सीधा असर संसदीय कार्यप्रणाली में पार्टी की सक्रियता पर पड़ेगा। सामान्य संसदीय प्रोटोकॉल के तहत, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में उन्हीं राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया जाता है, जिनके पास संसद में कम से कम पांच सदस्य होते हैं। ऐसे में, यदि शिवसेना यूबीटी के सांसदों की संख्या चार तक सीमित रह जाती है, तो उन्हें इन महत्वपूर्ण बैठकों से बाहर रखा जा सकता है। यह स्थिति उद्धव ठाकरे गुट के लिए संसद में अपनी बात रखने के मंच को सीमित कर देगी, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव और भी कम हो सकता है। फिलहाल, पार्टी का कार्यालय संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के रूम नंबर 128-ए में स्थित है, जो भविष्य में आवंटित न किए जाने की तलवार पर लटक रहा है।

कमरा नंबर 128 का विवाद और कार्यालय आवंटन का इतिहास
संसद परिसर में शिवसेना के दफ्तर का विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2022 में शिवसेना में हुई ऐतिहासिक टूट के बाद से ही कार्यालय पर अधिकार को लेकर दोनों गुटों में रस्साकशी जारी थी। कमरा नंबर 128 लंबे समय से अविभाजित शिवसेना का पारंपरिक संसदीय कार्यालय रहा था। 2023 में जब चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को ‘असली शिवसेना’ और ‘तीर-कमान’ चुनाव चिन्ह सौंपा, तो शिंदे गुट ने लोकसभा सचिवालय में मूल कार्यालय पर दावा ठोक दिया। आयोग के फैसले के आधार पर सचिवालय ने कमरा नंबर 128 शिंदे गुट को आवंटित कर दिया, जिसके बाद उद्धव गुट को हटना पड़ा और उन्हें बगल का कमरा नंबर 128-ए दिया गया। अब पुनः विलय की आहट ने इस अस्थायी ठिकाने पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
संसदीय कार्यालय आवंटन के नियम और परंपराएं
संसद भवन परिसर में राजनीतिक दलों को कार्यालय देने के लिए कोई लिखित वैधानिक कानून नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से संसदीय परंपराओं और ‘हाउस कमिटी’ के दिशानिर्देशों पर आधारित है। कार्यालय आवंटन का मुख्य आधार पार्टी के सांसदों की कुल संख्या और लोकसभा अध्यक्ष व राज्यसभा सभापति का विवेकाधिकार होता है। राष्ट्रीय दलों को कार्यालय मिलना अनिवार्य होता है, जबकि क्षेत्रीय दलों को उनकी सदस्य संख्या के आधार पर स्थान दिया जाता है। पांच सांसदों का आंकड़ा एक अलिखित लक्ष्मण रेखा की तरह है, जिसके पार जाते ही राजनीतिक दल कार्यालय और सर्वदलीय बैठकों में आमंत्रण पाने की पात्रता खो देते हैं। शिवसेना यूबीटी का भविष्य अब इसी संसदीय गणित के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है।
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