Shankh Yog : भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मनुष्य की जन्म कुंडली में बनने वाले विभिन्न शुभ और अशुभ योग उसके जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी योग है—’शंख योग’। यद्यपि शंख योग को सीधे तौर पर ‘राजयोग’ की श्रेणी में नहीं रखा जाता, परंतु इसका प्रभाव किसी राजयोग या धन योग से कम नहीं होता। यह योग व्यक्ति को जीवन की कठिन चुनौतियों से लड़ने का साहस, अपार सम्मान, विद्वत्ता, उच्च नैतिक मूल्य और समाज में प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में सहायक होता है। जिन जातकों की कुंडली में यह योग बनता है, वे न केवल परेशानियों से पार पाने में सक्षम होते हैं, बल्कि जीवन में क्रमिक प्रगति और आर्थिक स्थिरता भी प्राप्त करते हैं।

शंख योग का निर्माण: कुंडली में ग्रहों की विशेष स्थिति
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शंख योग के निर्माण की मुख्य रूप से दो स्थितियां होती हैं। पहली स्थिति में, जब कुंडली के पांचवें और छठे भाव के स्वामी आपस में ‘केंद्र’ संबंध बनाते हैं और वे केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में स्थित हों, साथ ही लग्नेश (लग्न का स्वामी) बली अवस्था में हो, तब शंख योग का उदय होता है। दूसरी स्थिति के अनुसार, यदि लग्नेश और दशम भाव का स्वामी मेष, कर्क, तुला या मकर राशि में विराजमान हों और नवम भाव का स्वामी शक्तिशाली हो, तो भी यह शुभ योग बनता है। इन दोनों ही परिस्थितियों के लिए अनिवार्य शर्त यह है कि कुंडली का लग्नेश नीच राशि में न हो और किसी भी क्रूर या पापी ग्रह के प्रभाव से मुक्त होकर बलवान स्थिति में होना चाहिए।

जीवन पर शंख योग का सकारात्मक प्रभाव
जिस जातक की कुंडली में शंख योग विद्यमान होता है, उसके व्यक्तित्व में एक अलग ही चमक और गंभीरता होती है। ऐसे व्यक्ति स्वभाव से न्यायप्रिय, अनुशासित और नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित होते हैं। यह योग जातक को उच्च शिक्षा, अद्भुत ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता और प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी कार्यों में सफलता दिलाता है। शंख योग से प्रभावित व्यक्तियों की वाणी मधुर और व्यक्तित्व अत्यधिक प्रभावशाली होता है, जिसके चलते समाज में उनकी प्रतिष्ठा दिन-दूनी रात-चौगुनी बढ़ती है। वे अक्सर समाजहित और लोक-कल्याण के कार्यों में बढ़-चढ़कर रुचि लेते हैं।
सावधानियां और योग की प्रभावशीलता
यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि मात्र कुंडली में शंख योग का उल्लेख होना ही सफलता की गारंटी नहीं है। ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि यदि इस योग का निर्माण करने वाले ग्रह स्वयं नीच राशि में स्थित हों, पाप ग्रहों से पीड़ित हों या अस्त होकर कमजोर हो गए हों, तो शंख योग के पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाते। ऐसे में योग की प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसलिए, किसी भी शुभ योग के फल को भोगने के लिए ग्रहों की स्थिति, दृष्टि और उनकी बलवान अवस्था का सही आकलन करना अनिवार्य होता है। स्पष्ट है कि शंख योग तभी पूर्ण परिणाम देता है जब कुंडली में ग्रहों का संतुलन सकारात्मक और मजबूत हो।
Read More : CRPF Jawan Suicide : बलरामपुर में CRPF जवान ने की आत्महत्या, पारिवारिक कलह बनी मौत की वजह











