Heart Health : जीवन का आधार हमारे हृदय की निरंतर धड़कन है, जो शरीर के हर अंग तक रक्त पहुँचाने का कार्य करती है। एक स्वस्थ व्यक्ति का हृदय विश्राम की स्थिति में प्रति मिनट 60 से 100 बार धड़कता है, जबकि एथलीटों या अत्यधिक शारीरिक रूप से फिट लोगों में यह दर और भी कम हो सकती है। अक्सर, लोग अचानक दिल की धड़कन तेज होने पर घबरा जाते हैं और इसे तुरंत ‘हार्ट अटैक’ जैसी गंभीर स्थिति मानकर डर जाते हैं। हालांकि, हर बार दिल की धड़कन का बढ़ना हृदय रोग का संकेत नहीं होता। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमारा हृदय किन परिस्थितियों में अपनी गति बदलता है और कब हमें चिकित्सीय परामर्श की आवश्यकता होती है।

दिल की धड़कन तेज होने के मुख्य कारण
हृदय की गति में अचानक वृद्धि के पीछे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक, दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। जब हम शारीरिक मेहनत या व्यायाम करते हैं, तो मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिससे हृदय तेजी से पंप करने लगता है। इसी प्रकार, तनाव, चिंता या अत्यधिक उत्तेजना भी पल्स रेट बढ़ा देती है। कैफीन, निकोटीन और एनर्जी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन भी इसे प्रभावित करता है। इसके अलावा, बुखार, संक्रमण, थायरॉइड संबंधी विकार या शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) भी हार्ट बीट तेज होने के प्रमुख कारण हो सकते हैं। कभी-कभी, ‘एट्रियल फाइब्रिलेशन’ या ‘सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया’ जैसी स्थितियां हृदय की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी के कारण धड़कन को असामान्य और तेज बना देती हैं।

क्या हर बार धड़कन का बढ़ना खतरनाक है?
शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. भुमेश त्यागी के अनुसार, हृदय गति में होने वाली हर वृद्धि चिंता का विषय नहीं है। व्यायाम या भावनात्मक प्रतिक्रिया के कारण होने वाली वृद्धि पूरी तरह सामान्य और स्वास्थ्यवर्धक है। हालांकि, यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के, आराम की स्थिति में भी हार्ट बीट 100 प्रति मिनट से अधिक बनी रहती है, तो इसे ‘टैकीकार्डिया’ (Tachycardia) कहा जाता है। बिना किसी कारण के लगातार तेज धड़कन होना आपके आंतरिक स्वास्थ्य में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
धड़कन को सामान्य करने के प्रभावी घरेलू उपाय
यदि अचानक आपकी धड़कन तेज महसूस हो, तो आप कुछ सरल तरीकों से इसे नियंत्रित कर सकते हैं। गहरी और लंबी सांसें लेना (Deep Breathing) हृदय की गति को शांत करने का सबसे प्रभावी प्राकृतिक तरीका है। इसके अलावा, शरीर को हाइड्रेटेड रखना, नियमित योग और ध्यान (Meditation) का अभ्यास करना तनाव कम करने में मदद करता है, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव दिल की धड़कन पर पड़ता है। आपात स्थिति में, जोर से खांसना या चेहरे पर ठंडा पानी छिड़कने से भी ‘वेगस नर्व’ उत्तेजित होती है, जो बढ़ी हुई पल्स रेट को तुरंत कम करने में सहायता कर सकती है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
यदि तेज धड़कन के साथ सीने में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी या सांस लेने में भारी कठिनाई जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करना ही लंबी आयु और स्वस्थ दिल की कुंजी है।
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