Bharat Tiwari Encounter : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुई भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर में मौत के बाद से ही राज्य की सियासत गरमाई हुई है। इस घटना ने सम्राट चौधरी सरकार के लिए भारी असहजता और किरकिरी की स्थिति पैदा कर दी थी। बढ़ते विवाद और जन-आक्रोश को देखते हुए सरकार ने अंततः इस मामले की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच कराने का बड़ा निर्णय लिया है। बुधवार, 24 जून 2026 को आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस जांच आयोग के गठन को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई। पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा इस एनकाउंटर की जांच की अध्यक्षता करेंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिल सकेगा।

फर्जी एनकाउंटर का आरोप: वायरल वीडियो बना सबूत
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद उस वीडियो को लेकर है, जो घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। परिजनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए थे और वह पूरी तरह से सरेंडर करने की मुद्रा में था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी, जो सीधे तौर पर एक फर्जी एनकाउंटर का मामला बनता है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली को लेकर ही राज्य भर में तीखी आलोचना हो रही है, जिसके दबाव में सरकार को अंततः घुटने टेकने पड़े।

सरकार का निर्णय: ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच’ का वादा
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 20 जून को अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस न्यायिक जांच की घोषणा की थी। उन्होंने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया था कि भोजपुर पुलिस मुठभेड़ की जांच एक स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी। सरकार का दावा है कि इस जांच का एकमात्र उद्देश्य घटना के प्रत्येक पहलू की पारदर्शिता के साथ पड़ताल करना है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। प्रशासन अब इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो यह तय करेगी कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सत्ता पक्ष में दो फाड़: एनडीए नेताओं की असहजता
इस एनकाउंटर ने न केवल सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी दरारें उजागर कर दी हैं। गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता इस पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। जब मीडिया ने इस विषय पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किए थे, तो उन्होंने चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा, जिससे राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई नेताओं का अब यह मानना है कि न्यायिक रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा।
न्याय की आस में परिवार और जनता
घटना के सात दिन बीत जाने के बाद भी क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। अब सबकी निगाहें रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाली इस कमेटी पर टिकी हैं। क्या रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को दोषी पाया जाएगा या फिर इसे एक सामान्य मुठभेड़ माना जाएगा? यह बड़ा सवाल बना हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर दोषी पुलिसकर्मियों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल, न्यायिक जांच का गठन सरकार के लिए एक राहत भरा कदम तो है, लेकिन असली न्याय तभी माना जाएगा जब रिपोर्ट के बाद ठोस कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
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