Kolkata Construction Ban : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को हुए एक भीषण हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक निर्माणाधीन गोदाम की छत का हिस्सा अचानक ढह जाने से 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इस दुखद घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 31 जुलाई तक सभी निर्माणाधीन इमारतों के काम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री ने न केवल इस दुर्घटना की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि कोलकाता, हावड़ा और बिधाननगर क्षेत्र में बन रही सभी इमारतों का अनिवार्य ऑडिट कराने की घोषणा भी की है।

ऑडिट के लिए गठित होगी विशेष टीम
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन अब कोई कोताही नहीं बरतेगा। इसके लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जिसमें पुलिस, अग्निशमन विभाग, पीडब्ल्यूडी (PWD), नागरिक सुरक्षा और कोलकाता नगर निगम के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह टीम कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बन रही व्यावसायिक इमारतों और विशेष रूप से जलाशयों के ऊपर बनी निर्माण संरचनाओं की बारीकी से जांच करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम उन सभी बिल्डिंग योजनाओं की भी पड़ताल करेगी जिन्हें पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मंजूरी दी गई थी।

हादसे की विभीषिका और रेस्क्यू ऑपरेशन
यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 12:07 बजे हुआ, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे के नीचे करीब 40 से 50 मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय पुलिस और नगर निगम के साथ-साथ सेना की टीम को भी तुरंत तैनात किया गया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरद्वत मुखर्जी ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक मलबे में फंसे आखिरी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर न निकाल लिया जाए। फिलहाल 20 घायल लोगों का इलाज चल रहा है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्रारंभिक जांच: निर्माण योजना में मिली बड़ी गड़बड़ी
मुख्यमंत्री ने शुरुआती जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि निर्माण के लिए मंजूर किए गए प्रोजेक्ट प्लान में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। उन्होंने खुलासा किया कि इस प्रोजेक्ट को 17 जनवरी, 2026 को मंजूरी दी गई थी। जमीन का मालिकाना हक एसएमपीए (SMPA) के पास है, जबकि इसे शंभूनाथ बेहरा और उनके पार्टनर को लीज पर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शुरुआती मंजूरी प्रक्रिया में ही गलत प्लान को पास कर दिया गया था, जो इस हादसे की मुख्य वजह बनी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
श्रमिकों की सुरक्षा पर चिंता
हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए लोगों में बड़ी संख्या बिहार से आए प्रवासी मजदूरों की है, जो काम की तलाश में केवल दो-तीन दिन पहले ही यहां पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने इन बेकसूर मजदूरों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि चंद लोगों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण निर्दोष मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सरकार अब इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि इस तरह की लापरवाही के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।
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