India Pakistan Talks : भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक सरकारी संवाद लंबे समय से ठप पड़ा है, लेकिन इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ‘ट्रैक टू’ डिप्लोमेसी का एक नया दौर शुरू हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सप्ताह कोलंबो और बैंकॉक में दोनों देशों के पूर्व अधिकारियों, राजनयिकों और विशेषज्ञों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गई हैं। इन अनौपचारिक वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच उपजे तनाव को कम करना, संकट के समय संचार के रास्तों को खुला रखना और किसी भी संभावित टकराव की स्थिति को रोकने के उपाय तलाशना है। इन बैठकों में आतंकवाद और जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की गई है।

‘ट्रैक वन’ चैनलों को मजबूत करने की कवायद
वियॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन ‘ट्रैक टू’ बैठकों में शामिल प्रतिनिधियों ने न केवल आपसी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, बल्कि इस बात पर भी मंथन किया कि इन अनौपचारिक वार्ताओं से निकले महत्वपूर्ण सुझावों और निष्कर्षों को औपचारिक ‘ट्रैक वन’ चैनलों (सरकारी स्तर की बातचीत) तक किस प्रकार पहुँचाया जाए। विदित है कि ‘ट्रैक वन’ वार्ता में दोनों देशों के वर्तमान सरकारी अधिकारी सीधी बातचीत करते हैं, जो वर्तमान में रुकी हुई है। पूर्व अधिकारियों की इन मुलाकातों का उद्देश्य एक ऐसा सेतु तैयार करना है, जिससे भविष्य में सरकारी बातचीत के लिए आधार तैयार किया जा सके। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में ऐसी 3 से 4 बार बैठकें हो चुकी हैं।

परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शांति की आवश्यकता
भारत और पाकिस्तान, दोनों ही परमाणु हथियार संपन्न देश हैं, और पिछले वर्ष हुए संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों, मीडिया कर्मियों और अकादमिक विद्वानों ने ‘ट्रैक टू’ स्तर पर आगे आने का निर्णय लिया है। न्यूट्रल जगहों (तीसरे देशों) पर हो रही ये बैठकें आधिकारिक रिश्तों में आई गतिरोध के बीच एक दुर्लभ बैक-चैनल के रूप में काम कर रही हैं। यह प्रक्रिया इस बात को सुनिश्चित करने का प्रयास है कि दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की गलतफहमी या छोटी घटना किसी बड़े युद्ध का कारण न बन जाए।
दोहा और अन्य वैश्विक राजधानियों में जारी है संवाद
‘ट्रैक टू’ डिप्लोमेसी का यह सिलसिला केवल कोलंबो या बैंकॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी दोहा सहित पश्चिमी एशिया की कई राजधानियों में इस तरह की उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। अप्रैल माह में भी इस तरह का एक दौर आयोजित किया गया था, जिसमें दोनों देशों की जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया था। इन बैठकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनसे तैयार की गई रिपोर्ट और सुझावों को दोनों देशों की सरकारों को भी सौंपा जाता है, ताकि नीति निर्माता स्थिति की गंभीरता और संभावनाओं को समझ सकें। यद्यपि यह बातचीत अनौपचारिक है, लेकिन जटिल समय में यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो रही है।
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