Passport Citizenship : हाल ही में विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए एक बयान ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल यात्रा के लिए एक दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि यदि पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे आधिकारिक दस्तावेज नागरिकता सिद्ध नहीं करते, तो आखिर एक आम भारतीय नागरिक अपनी राष्ट्रीयता साबित करने के लिए किस दस्तावेज पर भरोसा करे। सरकार का कहना है कि यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि कानूनी स्थिति दशकों से ऐसी ही रही है।

कांग्रेस का कटाक्ष: नागरिकता का आधार क्या है?
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सवाल किया कि यदि सरकार इन प्रमुख दस्तावेजों को नागरिकता का ठोस प्रमाण नहीं मानती, तो नागरिकों को किस आधार पर अपनी पहचान सिद्ध करनी चाहिए? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस द्वारा की जाने वाली गहन जांच प्रक्रिया निरर्थक है? उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नागरिकता का सही मापदंड क्या है—क्या यह कोई पार्टी आईडी है, या फिर किसी विचारधारा से जुड़ी टोपी या अन्य पहचान?

ओवैसी का आरोप: सरकार भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बयान को ‘भ्रम पैदा करने वाला’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि सरकार एक के बाद एक दस्तावेजों को नागरिकता के दायरे से बाहर कर रही है। ओवैसी ने पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6(2)(a) का हवाला देते हुए याद दिलाया कि कानूनन पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार का यही रुख रहा, तो भविष्य में राजनीतिक दल की सदस्यता ही नागरिकता का पर्याय न बन जाए, जो देश की लोकतांत्रिक बुनियाद के लिए खतरनाक है।
एनसीपी और टीएमसी ने मांगी स्पष्टता
एनसीपी (शरद पवार गुट) ने भी सरकार से इस मामले में पारदर्शिता की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि सरकार ने आधार और वोटर आईडी के बाद अब पासपोर्ट को भी नागरिकता के सबूत के रूप में नकार दिया है, जिससे आम जनता में भारी असमंजस की स्थिति है। वहीं, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी विदेश मंत्रालय के इस रुख पर गहरी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को अब देश के सामने यह साफ करना चाहिए कि नागरिकता के लिए किन दस्तावेजों की वैधता को मान्यता दी गई है, ताकि नागरिकों में फैला डर और भ्रम दूर हो सके।
समाधान की दिशा में बढ़ते सवाल
यह विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं और कानूनी व्याख्याएं अक्सर सामान्य नागरिकों के लिए उलझन का कारण बनती हैं। विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि सरकार नागरिकता को लेकर एक स्पष्ट और सर्वमान्य नीति सामने रखे। फिलहाल, पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्रों को लेकर छिड़ी यह बहस राजनीतिक गलियारों में गरमाती जा रही है, और अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है या नहीं।
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