Ambikapur News : अंबिकापुर कलाकेंद्र मैदान के आबंटन को लेकर सामने आए कथित लेनदेन वाले ऑडियो विवाद के बीच अब इस जमीन को उसके मूल स्वरूप “गांधी उद्यान” के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। तरुनीर समिति ने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कहा कि जिस भूमि को आज कलाकेंद्र मैदान के रूप में व्यावसायिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, वह सरकारी रिकॉर्ड में अब भी गांधी उद्यान के नाम से दर्ज है।

राजस्व रिकॉर्ड में आज भी दर्ज है गांधी उद्यान
तरुनीर समिति के अध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने ज्ञापन में बताया कि प्लॉट नंबर 508, रकबा 5.68 एकड़ भूमि राजस्व अभिलेखों में गांधी उद्यान के नाम से नगर पालिका अंबिकापुर के लिए दर्ज है। मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर 3 फरवरी 1989 को यह भूमि नगर पालिका को हस्तांतरित की गई थी, जिसकी लीज अवधि 31 मार्च 2018 तक थी और अब समाप्त हो चुकी है।

मीना बाजार और प्रदर्शनी के उपयोग पर आपत्ति
समिति का कहना है कि शासन ने इस भूमि को सार्वजनिक उद्यान के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दिया था, लेकिन वर्तमान में इसका उपयोग प्रदर्शनी, मीना बाजार, सर्कस और अन्य व्यावसायिक आयोजनों के लिए किया जा रहा है। इससे मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है और समय-समय पर आबंटन को लेकर विवाद भी सामने आते हैं।
ऑडियो विवाद के बाद फिर गरमाया मुद्दा
हाल ही में कलाकेंद्र मैदान के आबंटन को लेकर एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें लेनदेन के आरोप लगाए गए। इस विवाद के बाद महापौर मंजूषा भगत राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गईं। तरुनीर समिति का कहना है कि जब तक मैदान का व्यवसायिक उपयोग जारी रहेगा, तब तक इस तरह के विवाद और आरोप भी सामने आते रहेंगे।
आईटीआई के पीछे मैदान को बनाया जाए वैकल्पिक स्थल
ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि प्रदर्शनी, सर्कस और अन्य बड़े आयोजनों के लिए आईटीआई के पीछे स्थित मैदान का उपयोग किया जा सकता है। समिति का तर्क है कि वहां पार्किंग और यातायात संबंधी समस्याएं अपेक्षाकृत कम होंगी, जबकि कलेक्ट्रेट के सामने स्थित गांधी उद्यान को केवल हरित क्षेत्र और सार्वजनिक उद्यान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
शहर को मिले हरियाली और नागरिकों को खुला सार्वजनिक स्थल
समिति ने मांग की है कि गांधी उद्यान को उसके मूल स्वरूप में विकसित कर नागरिकों के लिए सुबह-शाम टहलने, बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के बैठने और सामाजिक गतिविधियों के लिए एक सुव्यवस्थित हरित क्षेत्र बनाया जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की सुंदरता बढ़ेगी और कलाकेंद्र मैदान से जुड़े बार-बार के विवादों पर भी विराम लग सकेगा।










