Teesta River Project : तीस्ता नदी प्रबंधन पर चीन और बांग्लादेश में सहमति, भारत के लिए बढ़ा सुरक्षा का संकट

Teesta River Project : गुरुवार, 25 जून 2026 को बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई है। बांग्लादेशी न्यूज़ एजेंसी बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, यह महत्वपूर्ण सहमति चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीच बीजिंग में हुई एक बैठक के दौरान बनी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा पर मलेशिया गए थे। इसके बाद वह 22 जून को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से चीन के डालियान पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था।

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तीस्ता प्रबंधन और तकनीकी सहायता के लिए चीनी सहयोग

बीजिंग में हुई इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने नदियों से गाद निकालने की एक व्यापक योजना प्रस्तुत की, जिसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ के खतरों को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का सही उपयोग करना है। रहमान ने चीन से बहुचर्चित तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए विशेष तकनीकी सहायता का भी अनुरोध किया। इसके जवाब में, चीन के मंत्री ने बांग्लादेश सरकार की इन जल संसाधन पहलों का स्वागत किया और अपनी ओर से पूर्ण तकनीकी एवं ढांचागत सहयोग प्रदान करने का ठोस आश्वासन दिया।

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सिंचाई और जल परिवहन को सुदृढ़ बनाने पर जोर

चीनी मंत्री ली गुओयिंग ने 2005 में ढाका और बीजिंग के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते तथा पिछले वर्ष चीनी जल विशेषज्ञों के बांग्लादेश दौरे का जिक्र करते हुए इस सहयोग को शोध आधारित और व्यावहारिक बताया। तारिक रहमान ने देश में नदी तटों के कटाव को रोकने, सिंचाई प्रणालियों के आधुनिकीकरण और आंतरिक जल परिवहन को मजबूत करने के लिए भी चीन से मदद मांगी। इसके जवाब में चीन ने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों को उन्नत प्रशिक्षण के लिए चीन आमंत्रित किया, ताकि वे जल प्रबंधन में चीनी अनुभवों का लाभ उठा सकें।

भारत-बांग्लादेश संबंधों के बीच तीस्ता कूटनीति

भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों में तीस्ता परियोजना हमेशा से एक बेहद संवेदनशील विषय रहा है। फरवरी में तारिक रहमान की सरकार के सत्ता में आने के बाद से नई दिल्ली और ढाका के संबंधों में सुधार के संकेत दिखे हैं। इससे पूर्व मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। पिछले महीने ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग दौरे पर तीस्ता पुनरुद्धार परियोजना के लिए चीन से औपचारिक समर्थन मांगा था। पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश पहुंचने वाली तीस्ता लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत है।

भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब रणनीतिक चिंताएं

चीन की दिलचस्पी वाली यह परियोजना भारत के अति संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है, जो भारतीय मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। इसी रणनीतिक और भू-राजनीतिक चिंता के चलते भारत ने 2024 में ढाका को तीस्ता बेसिन के लिए अपनी तकनीकी और संरक्षण सहायता की पेशकश की थी। दोनों पड़ोसी देशों के बीच जल बंटवारा हमेशा से एक अहम मुद्दा रहा है। यह विषय इस साल और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि 1996 में भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे (विशेषकर सूखे के मौसम में) को लेकर हुई 30 वर्षीय ऐतिहासिक संधि की मियाद इसी वर्ष समाप्त होने जा रही है।

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Chandan Das

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