Rhea Chakraborty Trauma : बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने हाल ही में नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चैट शो ‘डबल डेट’ में अपनी निजी जिंदगी के सबसे कठिन दौर पर खुलकर बात की। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उपजे विवाद और उससे जुड़े घटनाक्रम ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती को भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया था। वर्ष 2020 में सुशांत केस से जुड़ी ड्रग्स की जांच के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा गिरफ्तारी के बाद दोनों भाई-बहन को जेल जाना पड़ा था। इस शो में उन्होंने उस कठिन समय, गिरफ्तारी से जुड़ी मानसिक पीड़ा, थेरेपी और ‘हीलिंग’ (ठीक होने) की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की।

शोविक का टूटा सपना और करियर पर पड़ा गहरा प्रभाव
शोविक चक्रवर्ती ने अपनी जिंदगी के ‘चैप्टर 1’ को याद करते हुए बताया कि उस समय वे एक बेहद शांत और पढ़ाई में रुचि रखने वाले छात्र थे। उनका लक्ष्य MBA करना और IIM या व्हार्टन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लेना था। शोविक ने भावुक होते हुए कहा, “चैप्टर 1 बिल्कुल अलग था। मैं IIM में जाने की तैयारी कर रहा था, फिर अचानक सब कुछ बिखर गया। जिंदगी ने हमें ऐसी जगह ला खड़ा किया जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। इस सदमे से बाहर निकलने में हमें चार-पांच साल लग गए और आज भी कुछ दिन ऐसे होते हैं जब वह बीता हुआ कल मुझे डरा देता है।”

पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) का दंश
उस कठिन दौर के लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों पर बात करते हुए शोविक ने खुलासा किया कि वे अभी भी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उस दौर की अफरा-तफरी उनके मन पर इस कदर छाई हुई है कि आज भी अचानक डोरबेल बजने पर वे पुरानी यादों में खो जाते हैं। गिरफ्तारी के दौरान जो डर उनके मन में बैठ गया था, वह आज भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। हर घंटी पर उन्हें ऐसा महसूस होता है कि कोई फिर से उनके पीछे आ रहा है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हीलिंग एक निरंतर प्रक्रिया: रिया का दर्दनाक अनुभव
नेहा धूपिया के इस सवाल पर कि क्या वे उस गहरे सदमे से पूरी तरह उबर चुके हैं, रिया ने बहुत परिपक्वता के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप पूरी तरह भूल सकें। रिया ने बताया, “यह एक ऐसा सदमा है जो आपके दिमाग से निकलकर आपके शरीर में बस जाता है। हीलिंग (स्वस्थ होना) कोई एक मंजिल नहीं है, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली एक प्रक्रिया है। हमारा मामला सार्वजनिक था, इसलिए हर कोई इस पर बात करता है और राय रखता है, जिसे अब हम स्वीकार कर चुके हैं।”
सार्वजनिक नज़रों में संघर्ष और मानसिक दृढ़ता
रिया चक्रवर्ती ने स्वीकार किया कि उनका निजी संघर्ष सामान्य लोगों से अलग था, क्योंकि यह पूरी तरह से पब्लिक डोमेन (सार्वजनिक नज़रों) में था। जब समाज आपकी हर हरकत को जज कर रहा हो, तब मानसिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। रिया और शोविक की इस बातचीत ने यह दिखाया है कि कैसे किसी भी व्यक्ति का जीवन चंद दिनों में बदल सकता है। थेरेपी और अपनों के साथ ने उन्हें इस लड़ाई में टिके रहने में मदद की है। आज भी दोनों भाई-बहन उस भयानक दौर से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अपनी जिंदगी के नए पन्नों को सकारात्मक दिशा में लिखने का प्रयास कर रहे हैं।











