नाटो महासचिव के विवादित बयान के बाद इटली और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव तेजी से बढ़ गया है, इटली ने आरोपों को खारिज किया जबकि ईरान ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठाए, इस घटनाक्रम ने यूरोप और मध्य पूर्व के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है…
नाटो महासचिव के विवादित बयान के बाद इटली और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव तेजी से बढ़ गया है, इटली ने आरोपों को खारिज किया जबकि ईरान ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठाए, इस घटनाक्रम ने यूरोप और मध्य पूर्व के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है…

Middle East News : इटली और ईरान के बीच हालिया दिनों में कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में नाटो (NATO) के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुटे का एक बयान है, जिसने रोम और तेहरान के संबंधों में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, एक साक्षात्कार में रुटे ने दावा किया कि ईरान पर हमले के दौरान इटली में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से 500 अमेरिकी सैन्य विमानों ने उड़ान भरी थी। इस दावे के सार्वजनिक होने के बाद इटली के भीतर राजनीतिक विरोध की लहर दौड़ गई और सरकार को तुरंत सफाई देनी पड़ी। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के लिए यह बयान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही मोर्चों पर एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

विवाद तब गहराया जब मार्क रुटे ने कहा कि यूरोप के विभिन्न देशों ने अपने सैन्य अड्डे अमेरिका को उपलब्ध कराए, जिससे करीब 4,000 से 5,000 विमानों ने ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इस बयान ने इटली की उस आधिकारिक स्थिति पर सवालिया निशान लगा दिया, जिसमें मेलोनी सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया था कि इटली में अमेरिकी बेस का उपयोग केवल लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता के लिए किया जा सकता है, न कि ईरान पर सीधे हमले के लिए। रुटे का यह बयान सीधे तौर पर इटली के पहले के दावों के विपरीत था, जिससे ऐसा संकेत मिला कि इटली ने ईरान के खिलाफ युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई है।

इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मेलोनी ने मार्क रुटे पर गंभीर आरोप लगाए। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि नाटो महासचिव ने अलग-अलग प्रकार की उड़ानों और सहयोग के बीच भ्रम पैदा किया है। उन्होंने रुटे के बयान को ‘उत्साह में दिया गया बयान’ बताते हुए कहा कि नाटो प्रमुख अमेरिका को यह भरोसा दिलाने की जल्दबाजी में थे कि गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मेलोनी ने कड़े शब्दों में दोहराया कि इटली ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में बिल्कुल भी भाग नहीं लिया है। यदि इटली का कोई सीधा सैन्य हस्तक्षेप होता, तो स्थिति निश्चित रूप से बहुत अलग होती।
हालाँकि मेलोनी की सफाई के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई, जिसके चलते इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की। तायानी ने स्पष्ट किया कि इटली ने किसी भी सैन्य अभियान का समर्थन नहीं किया और न ही अपने बेस का इस्तेमाल जंग के लिए होने दिया। उन्होंने इस बातचीत में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का अनुरोध भी किया ताकि इटली के जहाज सुरक्षित निकल सकें। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने भी आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि वर्तमान में बेस से उड़ानें पिछली तुलना में काफी कम थीं।
दूसरी तरफ, ईरान ने नाटो महासचिव के बयान को आधार बनाकर इटली पर निशाना साधा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 3314 के अनुसार, यदि कोई देश अपनी जमीन का उपयोग किसी दूसरे देश पर हमले के लिए करने देता है, तो उसे उस हमले में भागीदार माना जाएगा। तेहरान का मानना है कि इटली ने अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की है। भले ही इटली अपनी स्थिति स्पष्ट करने की पूरी कोशिश कर रहा हो, लेकिन ईरान के रुख ने इस राजनयिक संकट को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे भविष्य में दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ना तय है।


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