Bangladesh China Relations : बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया चीन यात्रा ने दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में हलचल मचा दी है। बीजिंग में संपन्न हुई एक महत्वपूर्ण डील के तहत, बांग्लादेश ने ‘मोंगला पोर्ट इकोनॉमिक जोन’ के विकास के लिए चीन की सरकारी सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह विकास परियोजना बागेरहाट स्थित मोंगला पोर्ट से सटी 110 एकड़ भूमि पर क्रियान्वित की जाएगी। भारत के दृष्टिकोण से यह सौदा एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह वही भूमि है जिसे पहले भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय पहल के तहत ‘इंडियन इकोनॉमिक जोन’ के लिए निर्धारित किया गया था। इस बदलाव को चीन के बढ़ते प्रभाव और बांग्लादेश की बदलती निवेश प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय प्रोजेक्ट को दरकिनार कर चीन को मौका
उल्लेखनीय है कि मोंगला पोर्ट के पास स्थित इस महत्वपूर्ण जमीन को पूर्व में भारत के लिए आवंटित किया गया था। हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अक्टूबर 2025 में यह तर्क देते हुए इस प्रोजेक्ट को सूची से हटा दिया था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम शुरू नहीं हो सका। अब इस खाली जगह पर चीनी कंपनी का आना संकेत देता है कि ढाका अपनी आर्थिक नीतियों में चीन को भारत के मुकाबले अधिक तवज्जो दे रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के दौरान हुए इस समझौते को बांग्लादेश की निवेश रणनीति में एक बड़े यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है, जो क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ढाका का चीनी निवेश और औद्योगिक विस्तार पर जोर
मोंगला पोर्ट के अलावा, बांग्लादेश सरकार चीनी निवेश को आकर्षित करने के लिए अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय है। बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन्स अथॉरिटी ने चटोग्राम के अनवारा में एक अन्य ‘चीनी आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र’ के विकास के लिए चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन के साथ समझौता किया है। स्पष्ट है कि बांग्लादेश अपनी औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने के लिए चीन के वित्तीय और तकनीकी संसाधनों पर अधिक निर्भर हो रहा है। ये समझौते प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के मुख्य आकर्षण रहे हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
तीस्ता नदी परियोजना पर भी चीन का साथ
मोंगला पोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा, तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भी बांग्लादेश और चीन के बीच सहमति बन गई है। बीजिंग में चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हुआ कि चीन जल प्रबंधन के क्षेत्र में बांग्लादेश को अपनी विशेषज्ञता और अनुभव प्रदान करेगा। चीन के इस हस्तक्षेप को भारत के पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में बढ़ती पैठ के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, ढाका और बीजिंग के बीच ये हालिया समझौते न केवल आर्थिक हैं, बल्कि इनका गहरा रणनीतिक महत्व भी है। आने वाले समय में ये कदम भारत के लिए अपनी क्षेत्रीय नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।
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