Strait of Hormuz : ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बन गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण अटूट है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का प्रबंधन पूरी तरह से उनकी सेना के अधीन है। बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि किसी भी अन्य देश या शक्ति को होर्मुज के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका यह बयान अमेरिका द्वारा ईरानी संपत्तियों पर किए गए हालिया हमलों के बाद आया है, जिसने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है।

हमले और जवाबी कार्रवाई: गहराता सैन्य तनाव
तनाव की शुरुआत होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर हुए ड्रोन हमले से हुई, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। इस जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान के आईआरजीसी (IRGC) ने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। हालांकि, दोनों देशों ने युद्ध रोकने के लिए शुरुआती सहमति जताई थी, लेकिन बीते कुछ दिनों में हुई इन घटनाओं ने उस सीजफायर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इन सैन्य टकरावों ने खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया है।

दोहा में बातचीत की उम्मीद, कूटनीतिक समाधान की तलाश
बढ़ते तनाव को थामने और सैन्य टकराव को रोकने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच कतर की राजधानी दोहा में उच्च स्तरीय वार्ता होने वाली है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्ष तीन दिनों तक हमले रोकने और बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार हुए हैं। उम्मीद है कि मंगलवार को कतर में होने वाली इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद को सुलझाने के लिए कोई ठोस रास्ता निकाला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस वार्ता पर टिकी हैं, क्योंकि होर्मुज से जुड़ी अनिश्चितता न केवल मध्य-पूर्व, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर होर्मुज का प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्ग है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है, जो भारत और अन्य एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में लाइफलाइन की तरह काम करता है। विवाद का मुख्य बिंदु जहाजों की निगरानी और उन पर लगने वाला शुल्क है। जहाँ ईरान इसे अपने अधिकार क्षेत्र के तहत प्रबंधित करना चाहता है, वहीं अमेरिका का रुख है कि यह मार्ग बिना किसी शुल्क के अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। 28 फरवरी के बाद से इस मार्ग पर जारी हमलों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
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