Nepal Agricultural Crisis : नेपाल में इस समय कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि चल रही है, जिसे ‘आषाढ़’ का महीना कहा जाता है। आमतौर पर इस समय देश के खेत धान की रोपाई की हरियाली से लहलहा रहे होते हैं, लेकिन इस वर्ष स्थिति बिल्कुल विपरीत है। रातोपाटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई इलाकों में समय पर बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे किसान गहरे संकट में हैं। मानसून की सुस्त चाल और देश के मध्य व पश्चिमी हिस्सों में इसकी कमजोर सक्रियता ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। विशेष रूप से तराई क्षेत्र में, जिसे नेपाल का ‘अनाज भंडार’ कहा जाता है, तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जिससे नदियां और नहरें सूख गई हैं। सिंचाई की कमी ने उन छोटे किसानों की कमर तोड़ दी है जो पूरी तरह से वर्षा जल पर आशिव्रत हैं।

खाद का गंभीर संकट और तस्करी वाली खाद का सहारा
मानसून की मार के साथ-साथ नेपाली किसान रासायनिक खाद (केमिकल फर्टिलाइजर) की भारी किल्लत से भी जूझ रहे हैं। बाजार में सरकारी सब्सिडी वाली खाद न मिलने के कारण किसान विवश होकर भारत की सीमा से तस्करी कर लाई गई महंगी और घटिया गुणवत्ता वाली खाद खरीदने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि कृषि की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। खाद की कमी के कारण धान की रोपाई की गति अत्यंत धीमी हो गई है, जिससे नेपाल के खाद्य सुरक्षा संकट के और गहराने की आशंका बनी हुई है।

भारत से खाद की खेप पर टिकी है नेपाल सरकार की उम्मीद
नेपाल सरकार इस समय देश भर के डिपो के जरिए प्रतिदिन लगभग 2,500 से 3,000 टन खाद वितरित कर रही है। हालांकि, धान की रोपाई के चरम समय को देखते हुए इस मांग के 5,000 टन प्रतिदिन तक पहुँचने का अनुमान है। सरकार ने अषाढ़ के अंत तक करीब 6 लाख टन खाद वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अपनी इस योजना को सफल बनाने के लिए नेपाल सरकार की नजरें पूरी तरह से भारत से आने वाली खाद पर टिकी हैं। भारत और नेपाल के बीच हुए ‘गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट’ (G2G) समझौते के तहत खाद की खेप जुलाई के अंतिम सप्ताह तक पहुँचने की प्रबल संभावना है।
राहत की उम्मीद: आपूर्ति श्रृंखला में सुधार का इंतजार
नेपाल के कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत यह है कि कोलकाता बंदरगाह पर खाद के छह जहाज पहले ही पहुँच चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 2.45 लाख टन खाद लदी हुई है, जिसे जल्द ही नेपाल तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि अगस्त के पहले हफ्ते तक खाद की उपलब्धता में काफी सुधार आ जाएगा, जिससे रोपाई की प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि, वर्तमान में किसान जो चुनौतियां झेल रहे हैं, वे नेपाल की कृषि प्रणाली की अस्थिरता और मौसम पर अत्यधिक निर्भरता को रेखांकित करती हैं। आने वाला समय यह तय करेगा कि क्या भारत से समय पर मिलने वाली यह खाद नेपाली किसानों की फसल और भविष्य को बचाने में कारगर साबित हो पाएगी।
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