US Iran Relations : मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बड़ा दावा किया कि ईरान ने कतर की राजधानी दोहा में बैठक का अनुरोध किया है, जो अगले दिन ही आयोजित होने वाली है। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी। हालांकि, इस दावे के कुछ ही घंटों बाद तेहरान ने पूरी तरह से इस खबर का खंडन कर दिया है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कथित ‘बैकचैनल’ कूटनीति और उनके सार्वजनिक बयानों के बीच एक गहरा विरोधाभास उभरकर सामने आया है। यह घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनावपूर्ण घटनाओं के बाद बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

ईरानी उप विदेश मंत्री ने तकनीकी बैठक की खबरों को नकारा
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि इस सप्ताह कतर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की ‘तकनीकी टीम’ या वर्किंग ग्रुप की बैठक का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, गरीबाबादी ने कहा कि हालांकि कतर के साथ ईरान की सामान्य बातचीत जारी है, जिसमें द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन पर चर्चा होती है, लेकिन दोहा में होने वाली किसी भी तकनीकी वार्ता की खबर निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी बातचीत का अगला दौर तभी संभव होगा जब सभी पूर्व-शर्तें पूरी हो जाएंगी और दोनों पक्ष तारीख व स्थान पर आम सहमति बना लेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स और कूटनीतिक संशय का दौर
ट्रंप के दावे और ईरान के खंडन के बीच मीडिया रिपोर्ट्स ने भी काफी भ्रम की स्थिति पैदा की है। इससे पूर्व, अल जजीरा सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने यह सूचना प्रसारित की थी कि मंगलवार को दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता होने की प्रबल संभावना है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी बयान अक्सर पर्दे के पीछे चल रही वार्ताओं के दौरान राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा होते हैं। मध्यस्थ देशों के माध्यम से अब भी बातचीत का सिलसिला चल रहा है, लेकिन आधिकारिक सहमति के बिना किसी भी बैठक की पुष्टि करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी
इसी बीच, ईरान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधित्व की घोषणा की है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम संस्कार के लिए भारत एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। सूत्रों के अनुसार, इस शोकपूर्ण अवसर पर भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन करेंगे। अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में आगामी 4 से 9 जुलाई के बीच संपन्न होंगी। भारत द्वारा इस प्रतिनिधिमंडल को भेजना ईरान के साथ अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह राजनयिक यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।











