Ambikapur Corruption Case : अंबिकापुर कलेक्टोरेट में वर्षों तक पदस्थ रहे चर्चित क्लर्क ऋषि कुमार सिंह को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विशेष न्यायालय ने चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है तथा करीब एक किलो सोने के आभूषण और 14.95 लाख रुपये की जब्त नकदी को राजसात करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2013 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है।

2013 में ACB ने मारा था छापा
एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने 18 जून 2013 को अंबिकापुर के केदारपुर स्थित ऋषि कुमार सिंह के आवास पर छापा मारा था। उस समय वह कलेक्टोरेट में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। जांच के दौरान उनके घर से 14 लाख 12 हजार रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण तथा कई अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे।

ACB की प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि आरोपी के पास उसकी वैध आय की तुलना में अत्यधिक संपत्ति मौजूद है। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ FIR दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू की गई।
जांच में खुली करोड़ों की संपत्ति
जांच एजेंसी ने पाया कि जुलाई 1984 से 19 जून 2013 तक की सेवा अवधि में ऋषि कुमार सिंह, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम पर कुल 4 करोड़ 49 लाख 46 हजार 736 रुपये की चल एवं अचल संपत्ति थी।
दूसरी ओर, इसी अवधि में उनके ज्ञात एवं वैध आय स्रोतों से कुल आय लगभग 39 लाख 11 हजार 79 रुपये ही थी। इस प्रकार उनकी संपत्ति वैध आय से 4 करोड़ 10 लाख 35 हजार 657 रुपये अधिक पाई गई, जो लगभग 1049 प्रतिशत अतिरिक्त संपत्ति के बराबर थी।

परिवार के नाम पर दर्ज थीं कई संपत्तियां
ACB की जांच में सामने आया कि ऋषि कुमार सिंह ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कई मूल्यवान संपत्तियां अर्जित की थीं।
इनमें केदारपुर अंबिकापुर स्थित दो मंजिला आलीशान मकान, ग्राम डिगमा में पुत्र सचिन कुमार सिंह के नाम फार्म हाउस, भगवापुर क्षेत्र में पुत्री रश्मि सिंह के नाम फार्म हाउस, एक अंडर कंस्ट्रक्शन मैरिज हॉल, कुंडला सिटी में बच्चों के नाम अधनिर्मित मकान तथा दत्ता कॉलोनी नमनाकला में पत्नी के नाम आवास शामिल था। जांच एजेंसी ने इन सभी संपत्तियों को आय के अनुपात में संदिग्ध माना।
बैंक लॉकर से मिला सोना और चांदी
जांच के दौरान SBI बैंक लॉकर की भी तलाशी ली गई। वहां से 82,500 रुपये नकद, लगभग 950.09 ग्राम सोना तथा 856 ग्राम चांदी के आभूषण जब्त किए गए।
जब्त किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का उस समय का मूल्य 25 लाख 47 हजार 598 रुपये आंका गया था। यह बरामदगी ACB के लिए मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी।
2018 में पेश हुआ अभियोग पत्र
लगातार चली विवेचना के बाद ACB ने वर्ष 2018 में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद कई वर्षों तक गवाहों, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर सुनवाई चलती रही।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने आय, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और जब्ती पंचनामे सहित अनेक साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं आरोपी अपनी बेहिसाब संपत्ति का संतोषजनक स्रोत साबित नहीं कर सके।
अदालत ने सुनाई चार साल की सजा
विशेष सत्र न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) सहपठित धारा 13(2) के तहत ऋषि कुमार सिंह को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने उन्हें चार वर्ष के कठोर कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही एक किलो के करीब सोने के आभूषण एवं 14 लाख 95 हजार रुपये की जब्त नकदी को राजसात करने का आदेश दिया गया। अदालत ने उनकी जमानत निरस्त करते हुए तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने के निर्देश भी दिए।
रिटायरमेंट के एक साल बाद आया फैसला
ऋषि कुमार सिंह अंबिकापुर कलेक्टोरेट के चर्चित कर्मचारियों में गिने जाते थे। वर्ष 2011 में तत्कालीन कलेक्टर गेंद सिंह धनंजय के कार्यकाल में बंगाली पुनर्वास भूमि की बिक्री अनुमति से जुड़े मामलों को लेकर उनका नाम विवादों में भी आया था।
बाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के दौरान उन्हें एक मामले में निलंबित भी किया गया था। विशेष बात यह रही कि अदालत का अंतिम फैसला उनके रिटायरमेंट के लगभग एक वर्ष बाद आया, जिससे 13 वर्ष पुराने भ्रष्टाचार मामले का न्यायिक निष्कर्ष सामने आया।











