Mainpath Public Hearing : मैनपाट में बॉक्साइट खदानों की जनसुनवाई में बवाल, पर्यटन और धार्मिक स्थलों की जानकारी छिपाने का आरोप

Mainpath Public Hearing : मैनपाट में प्रस्तावित चार नई बॉक्साइट खदानों के माइनिंग प्लान में पर्यटन और धार्मिक स्थलों को छिपाने पर बुधवार को जमकर विरोध हुआ। कमलेश्वरपुर में आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप लगाकर कार्यवाही रोकने की कोशिश की। भारी हंगामे के बीच पुलिस बल की मौजूदगी में जनसुनवाई पूरी कराई गई।

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छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने मैनपाट में चार नई बॉक्साइट खदानों का माइनिंग प्लान तैयार किया है। बुधवार को कमलेश्वरपुर पंचायत में जनसुनवाई रखी गई। माइनिंग प्लान देखते ही ग्रामीण भड़क गए। आरोप है कि प्लान में कमलेश्वरपुर और आसपास के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों का जिक्र तक नहीं है।

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कमलेश्वरपुर में तिब्बती शरणार्थियों की बसाहट और रिजर्व फॉरेस्ट का इलाका होने के बावजूद इन तथ्यों को दबा दिया गया। ग्रामीणों ने मंच से चेतावनी दी – पर्यटन की बलि देकर एक इंच भी बॉक्साइट नहीं खोदने देंगे। भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने भी सुर में सुर मिलाया। कहा कि डीजीएमएस की गाइडलाइन ताक पर रखकर खदान खोलने की साजिश हो रही है।

विधायक बोले-शासन को गुमराह कर ली जा रही मंजूरी

जनसुनवाई में पहुंचे सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने माइनिंग प्लान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा- दस्तावेज छिपाकर, शासन को गलत जानकारी देकर बॉक्साइट खदान की स्वीकृति लेने का प्रयास सफल नहीं होगा, इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। अधिकारियों को दस्तावेजों और माइनिंग प्लान में सुधार करना होगा।

विधायक ने चेतावनी दी कि यदि दस्तावेजों में हेरफेर नहीं सुधरी तो यह प्रकरण सीधे विधानसभा में उठेगा। माइनिंग प्लान पर दस्तखत करने वाले एक-एक अधिकारी पर कार्रवाई कराएंगे। ग्राम सभा जो तय करेगी, वही मेरा निर्णय होगा। मैनपाट को उजाड़ने नहीं दूंगा।

अमरजीत भगत पर हमला- अब रोने से क्या होगा

विधायक टोप्पो ने पूर्व मंत्री अमरजीत भगत को भी निशाने पर लिया। कहा कि मैनपाट में बाक्साइट खनन की नींव कांग्रेस शासन में ही रखी गई। 1992 में 639 हेक्टेयर जमीन बालको को दी गई। जिसे हमारी सरकार बनने के बाद निरस्त करा खदान क्षेत्र को समतल कराने का काम कराया जाएगा।1996 से 2004 तक सीएमडीसी की खदानें खुलीं। 2018 में कांग्रेस सरकार बनते ही 50 साल के लिए लीज पर दे दी गई। 2022 में भी कांग्रेस राज में ही नई खदानों को हरी झंडी मिली।

टोप्पो ने तंज कसा- पिछली जनसुनवाई में अमरजीत भगत खूब गरजे। दो साल पहले गरजते तो आज मैनपाट की यह हालत नहीं होती। उनकी मौन सहमति से ही खदानें खुलीं। अब राजनीति चमकाने के लिए आंसू बहाने से क्या होगा?” उन्होंने कहा- अमरजीत भगत दोहरा चरित्र छोड़ें। मैनपाट के युवाओं को भड़काना बंद करें। मैं उन्हें बड़ा भाई मानता हूं, लेकिन मैनपाट के हितों से समझौता नहीं करूंगा।

1992 से 2022 तक कांग्रेस राज में ही बिछा खदानों का जाल

विधायक ने सिलसिलेवार बताया कि 1992 में बालको, 1996-2004 में सीएमडीसी और 2018-2022 में कांग्रेस सरकार के दौरान मैनपाट में खदानों का जाल बिछा। 2004 में अमरजीत भगत विधायक थे। तब विरोध क्यों नहीं किया? आज जब भाजपा सरकार गड्ढे भरवा रही है, तब उन्हें मैनपाट की याद आ रही है। जुलाई 2025 में बालको की लीज खत्म कर दी गई है। अब उन गड्ढों को भरने का काम होगा। यह मैनपाट के लिए ऐतिहासिक कदम है। जनसुनवाई में ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि पर्यटन और आस्था के केंद्रों को मिटाकर खनन नहीं होने देंगे। दस्तावेजों में संशोधन नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।

पूर्व मंत्री भगत ने जनसुनवाई स्थगित करने रखी मांग

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कलेक्टर सरगुजा को पत्र लिखकर मैनपाट की छह ग्राम पंचायतों में सीएमडीसी द्वारा आयोजित जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा विकासखंड मैनपाट के ग्राम पंचायत सरभंजा, नर्मदापुर, कुनिया, रोपाखार, लुरैना एवं पथरई में सीएमडीसी द्वारा जनसुनवाई को स्थगित करने हेतु अनुरोध किया गया है। अतः उक्त ग्राम पंचायतों में होने वाली जनसुनवाई को स्थगित करें।

जहां धरती डोलती है उसका अस्तित्व भी मिट जाएगा

ग्राम पंचायत रोपाखार के उप सरपंच व भाजपा नेता रजनीश पांडेय ने आरोप लगाया कि रोपाखार और कमलेश्वरपुर में नई खदानों की स्वीकृति की जानकारी तक संबंधित ग्राम पंचायतों को नहीं दी गई है। बिना ग्राम पंचायत की सहमति के स्वीकृति कैसे दी जा सकती है।उप सरपंच रजनीश पांडेय ने कहा कि इन खदानों की स्वीकृति के लिए बौद्ध मंदिर, प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और रिजर्व फॉरेस्ट की जानकारी को छिपाई गई है। माइनिंग प्लान में इन महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख ही नहीं है।

रजनीश पांडेय ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मैनपाट का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जलजली ‘जहां धरती डोलती है वह प्रस्तावित खनन क्षेत्र से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। लेकिन माइनिंग प्लान में इसे 10 किलोमीटर दूर दिखा दिया गया है। दस्तावेजों में हेरफेर कर शासन को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैनपाट में रोज हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इनसे सैकड़ों लोगों का रोजगार जुड़ा है। सीएमडीसी द्वारा फर्जी तरीके से बताया गया है कि नई खदानों से 50 से 60 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

उप सरपंच ने कहा कि पहले से मैनपाट में सात खदानें स्वीकृत हैं, जिनमें सीएमडीसी के अधिकारी और निजी कंपनियों के मालिकों द्वारा मिलीभगत कर नियमों को ताक में रखकर माइनिंग की जा रही है। मजदूरों का शोषण हो रहा है। रजनीश पांडेय ने दो टूक कहा कि इन खदानों की स्वीकृति किसी भी हाल में नहीं हो पाएगी और न ही सीएमडीसी को माइनिंग करने देंगे। गलत जानकारी देकर स्वीकृति कराई गई है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। पंचायत और ग्रामीण एकजुट होकर खदानों का विरोध करेंगे।

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