Bharat Bhushan Encounter : भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी डीएसपी राजेश शर्मा की पटना में नई तैनाती ने प्रशासनिक गलियारों और पीड़ित परिवार के बीच हलचल मचा दी है। उन्हें अब मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद जब उनके परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई थी, तब राजेश शर्मा को तत्कालीन एसडीपीओ के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय (लाइन हाजिर) भेज दिया गया था। अब उन्हें एक महत्वपूर्ण विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल उठने लगे हैं।

पीड़ित परिवार का दर्द: ‘न्याय के बदले मिला प्रमोशन?’
भरत भूषण तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने इस प्रशासनिक निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका स्पष्ट मानना है कि यह कदम न्याय की मूल भावना के विपरीत है। काशीनाथ तिवारी का कहना है कि जिस अधिकारी के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो, उसे कार्रवाई के बजाय नई जिम्मेदारी सौंपना पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा डगमगाने लगता है। उनके अनुसार, यह केवल उनके बेटे की हत्या का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज की न्याय प्रणाली के सामने एक बड़ा नैतिक प्रश्न है।

न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा, पर प्रशासनिक फैसलों से निराशा
काशीनाथ तिवारी ने आगे कहा कि उनका परिवार पूरी निष्ठा के साथ न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखता है, लेकिन हालिया प्रशासनिक निर्णयों ने उन्हें निराश किया है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि आरोपी अधिकारी को सक्रिय ड्यूटी पर वापस लाया जाता है, तो इससे निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पीड़ित परिवार का तर्क है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के प्रति प्रशासनिक सतर्कता बरती जानी चाहिए थी ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर सरकार और पुलिस विभाग के रुख से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें अब न्याय की उम्मीद कम होती नजर आ रही है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान और कानूनी लड़ाई की दृढ़ता
परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे इस अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे। काशीनाथ तिवारी ने चेतावनी दी है कि जब तक मामले की पारदर्शी जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगा और न्यायालय में इस मामले को पूरी मजबूती के साथ लड़ेगा। न्याय में हो रही देरी के बावजूद, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और अपने संघर्ष को अंतिम तार्किक परिणति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विभाग की चुप्पी और बढ़ती जनचर्चा
डीएसपी राजेश शर्मा की इस नई पोस्टिंग को लेकर पुलिस विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय कहा जा सकता है, लेकिन पीड़ित परिवार और समाज के जागरूक वर्ग में इसे लेकर भारी असंतोष व्याप्त है। विभाग की चुप्पी ने इस मामले में चल रही विभिन्न प्रकार की चर्चाओं को और अधिक बल दे दिया है। नागरिक समाज के जानकारों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में विभाग को अधिक संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखानी चाहिए थी, ताकि जांच की साख बनी रहे।
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