India Doping Cases : भारत में डोपिंग का बढ़ता संकट, एथलेटिक्स की साख और भविष्य पर बड़ा सवाल

भारत में डोपिंग के बढ़ते मामलों ने खेल जगत में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत लगातार शीर्ष देशों में बना हुआ है, जबकि एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट ने इसे ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और प्रदर्शन दोनों पर असर पड़ सकता है।

India Doping Cases : एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने भारतीय खेल जगत को एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। वैश्विक स्तर पर डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों की सूची में भारत 162 सक्रिय मामलों के साथ पहले स्थान पर काबिज हो गया है। इस सूची में कीनिया 148 मामलों के साथ दूसरे और रूस 60 से अधिक मामलों के साथ तीसरे पायदान पर है। यह स्थिति न केवल भारतीय एथलेटिक्स की साख पर सवाल उठाती है, बल्कि उन गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है जिनका सामना वर्तमान में भारतीय खिलाड़ी और खेल प्रशासन कर रहे हैं।

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केवल सेवन ही नहीं, अन्य नियमों का उल्लंघन भी है कारण

एआईयू की इस सूची में केवल प्रतिबंधित दवाओं (स्टेरॉयड) का सेवन करने वाले खिलाड़ी ही शामिल नहीं हैं। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने डोपिंग रोधी नियमों के अन्य पहलुओं का उल्लंघन किया है, जैसे कि नमूने देने से बचना, परीक्षण के दौरान छेड़छाड़, प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, या अपने ‘व्हेयर-अबाउट्स’ (ठिकाने) की जानकारी न देना। नियम स्पष्ट हैं कि इन अपराधों को डोपिंग के ही समान गंभीर माना जाता है और इनके लिए एथलीटों को डोपिंग जैसी ही कड़ी सजा का सामना करना पड़ता है।

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‘बहुत अधिक’ जोखिम वाले देश के रूप में पहचान

विश्व एथलेटिक्स द्वारा स्थापित स्वतंत्र संस्था एआईयू ने भारतीय एथलेटिक्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पिछले दो वर्षों से लगातार सूची में शीर्ष पर बने रहने के कारण, विश्व एथलेटिक्स ने अप्रैल महीने में ही भारत को ‘बहुत अधिक डोपिंग जोखिम’ वाले देश के रूप में वर्गीकृत कर दिया था। एआईयू बोर्ड ने हाल ही में भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) को ‘वर्ग बी’ से हटाकर ‘वर्ग ए’ में स्थानांतरित कर दिया है। एआईयू अध्यक्ष डेविड हाउमैन के अनुसार, भारत में घरेलू स्तर पर डोपिंग रोधी कार्यक्रम की गुणवत्ता एथलीटों के स्तर और डोपिंग के जोखिम के अनुपात में बेहद कमजोर है।

आंकड़ों में बढ़ता ग्राफ: लगातार शीर्ष दो में भारत

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है। वर्ष 2022 में भारत 48 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर था, 2023 में 63 मामलों के साथ फिर दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन 2024 में 71 और 2025 में अब तक 30 मामलों के साथ भारत सीधे पहले स्थान पर आ गया है। एआईयू द्वारा सदस्य संघों को उनके डोपिंग इतिहास के आधार पर श्रेणियों (ए, बी, और सी) में बांटा जाता है। ‘श्रेणी ए’ में शामिल होने का अर्थ है कि अब भारतीय एथलीटों पर अत्यंत कड़े नियम लागू होंगे और उनकी राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों का व्यापक एवं बार-बार परीक्षण किया जाएगा।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए कठिन डगर

एआईयू का मानना है कि डोपिंग के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही को खत्म करना अब अनिवार्य है। हालांकि एआईयू किसी भी सदस्य संघ की श्रेणी को तीन साल की अवधि के दौरान कभी भी बदल सकता है, लेकिन भारत का ‘श्रेणी ए’ में आना यह संकेत देता है कि देश को डोपिंग मुक्त खेल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए अपने जमीनी स्तर के कार्यक्रमों और जागरूकता में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है। अन्यथा, यह बढ़ता हुआ आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय एथलीटों की भागीदारी और प्रतिष्ठा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

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Chandan Das

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