PM Modi News: दोनों देशों के बीच आयोजित वार्ता के बाद नया इतिहास रचा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के साथ व्यापक चर्चा की। बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा दोनों देशों के बीच आपसी रणनीतिक विश्वास बढ़ा है और द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत हुए हैं। यह अटूट विश्वास ही सबसे बड़ी साझा धरोहर है। वर्तमान में दोनों राष्ट्र विश्व पटल पर बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के रूप में मजबूती से स्थापित हैं। इस अवसर पर पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री तकाइची का स्वागत करते हुए उन्हें अपनी ‘छोटी बहन’ कहकर संबोधित किया।

एआई, हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की नई प्रतिबद्धता
इस शिखर सम्मेलन के दौरान भविष्य की तकनीकों पर दूरगामी सहमति बनी। बैठक का मुख्य आकर्षण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में हुआ समझौता रहा। इसके साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए दोनों देशों ने ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह महत्वपूर्ण कदम वैश्विक स्तर पर सतत विकास और तकनीकी नवाचार को और अधिक बढ़ावा देगा।

स्वतंत्र और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों लोकतांत्रिक देशों की साझा प्राथमिकता
संयुक्त प्रेस वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है। पीएम मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि ये रणनीतिक कदम संपूर्ण क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘यूनिकॉर्न’ एंटीना और चिकित्सा उपकरण समझौता
दोनों नेताओं का मानना है कि तकनीकी साझेदारी सहयोग का मजबूत स्तंभ बनेगी। इसी दृष्टि से एआई क्षेत्र में संयुक्त वक्तव्य जारी हुआ और प्रमुख संस्थानों ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जापान की सटीक तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम इसे नई गति देगा। रक्षा क्षेत्र में भी पहली संयुक्त सह-विकास परियोजना के तहत नौसेना के रेडियो एंटीना ‘यूनिकॉर्न’ से जुड़ा ऐतिहासिक समझौता हुआ, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के माध्यम से दोनों देश उन्नत स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराएंगे।
भारत में आएगा 10 अरब डॉलर का निवेश, व्यापारिक संबंध होंगे दोगुने
पिछले एक वर्ष में लगभग 120 नए व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक का जापानी निवेश आएगा। वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच हुआ नया समझौता पूंजी प्रवाह को सुगम बनाएगा। हमारा लक्ष्य जापान से 10 ट्रिलियन येन का निवेश आकर्षित करना और अगले दशक में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करना है। भारत में हो रहे निरंतर सुधारों से कारोबार करना आसान हुआ है और जापानी कंपनियां भारत के इस विकासशील बाज़ार में अवसर का पूरा लाभ उठा सकती हैं।
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