School Mantra Row : छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आयोजन को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में तब्दील हो चुका है। दुर्ग दौरे पर पहुंचे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं का विरोध करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह देश की मूल पहचान के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। यह विवाद राज्य में शिक्षा और संस्कृति के समन्वय को लेकर एक नई बहस छेड़ चुका है।

‘मदरसों और क्रिश्चियन स्कूलों पर मौन क्यों?’
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस का दोहरा चरित्र अक्सर सामने आता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब क्रिश्चियन मिशनरी स्कूलों में प्रार्थनाएं होती हैं या मदरसों में विशिष्ट धार्मिक शिक्षा दी जाती है, तब कांग्रेस के नेता खामोश रहते हैं और उस पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताते। लेकिन जैसे ही सरकारी स्कूलों में भारतीय परंपरा, मंत्रोच्चार या वंदे मातरम के गायन की बात आती है, कांग्रेस तुरंत विरोध के सुर बुलंद करने लगती है। मंत्री के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे जानबूझकर भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों को विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

मंत्रोच्चार के वैज्ञानिक लाभों पर मंत्री का जोर
शिक्षा मंत्री ने केवल धार्मिक दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि मंत्रोच्चार के पीछे वैज्ञानिक आधार का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मंत्रों का लयबद्ध उच्चारण प्रति सेकंड ऐसी ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है, जो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। उनके अनुसार, यह न केवल बच्चों की एकाग्रता को बढ़ाता है, बल्कि उनके मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को भी तीव्र करता है। मंत्री का मानना है कि स्कूलों में इन गतिविधियों का एकमात्र उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और संस्कार का संचार करना है, न कि किसी विशेष धर्म का प्रचार करना। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति से भी जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वंदे मातरम के विरोध को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
कांग्रेस नेताओं द्वारा वंदे मातरम और राष्ट्रगीत पर जताई गई आपत्तियों पर शिक्षा मंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये हमारे देश की गौरवशाली पहचान और सम्मान के प्रतीक हैं, और इनका विरोध करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी हरकतें जनता के बीच गलत संदेश भेजती हैं। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने यह सुनिश्चित किया कि सरकार अपनी नीतियों से पीछे नहीं हटेगी और स्कूलों को एक ऐसा केंद्र बनाएगी जहाँ विद्यार्थी अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। फिलहाल, इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही यह तनातनी आने वाले दिनों में और अधिक उग्र होने के आसार हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।
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