नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। Brijmohan Agrawal ने अपनी ही सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। इस बयान के बाद मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है और बहस तेज हो गई है।
नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। Brijmohan Agrawal ने अपनी ही सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। इस बयान के बाद मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है और बहस तेज हो गई है।

Nakti Village Bulldozer Action : रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने अब राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब रायपुर लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद और वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों के विरुद्ध कड़ा रुख अपना लिया। सांसद अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि रात के अंधेरे में ग्रामीणों के घरों पर बुलडोजर चलाना पूरी तरह से अनुचित और अमानवीय कृत्य है। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘माफी के अयोग्य’ बताते हुए इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। सांसद का यह कड़ा स्टैंड बताता है कि वे अपने क्षेत्र की जनता के हितों से समझौता करने के मूड में नहीं हैं।


सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक कार्रवाई का एक निश्चित तरीका और समय होता है, लेकिन नकटी गांव में अपनाई गई प्रक्रिया गलत थी। उन्होंने कहा कि रात के समय की गई तोड़फोड़ से स्थानीय लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास और असंतोष पैदा हुआ है। अग्रवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी अधिकारी इस गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उनका उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को रोकना है ताकि कोई भी अधिकारी मनमानी न कर सके।

अपनी निष्ठा और जनता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इस पूरे मुद्दे पर उनका रुख पहले दिन से बिल्कुल स्पष्ट रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं नकटी के विस्थापित ग्रामीणों के साथ खड़ा हूं। मैं उनके संघर्ष में कल भी उनके साथ था, आज भी उनके साथ हूं और भविष्य में भी उनके साथ ही खड़ा रहूंगा।” सांसद के इस बयाने ने साफ कर दिया है कि वे अपनी पार्टी और सरकार के भीतर भी जनता की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस रुख से ग्रामीणों का मनोबल बढ़ा है, जबकि प्रशासन के लिए स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
नकटी गांव के विस्थापित ग्रामीणों के आंदोलन और कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरे जाने के बीच, बीजेपी सांसद का यह बयान राज्य सरकार के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अपने अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी और क्या ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी। फिलहाल, बृजमोहन अग्रवाल के इस स्टैंड ने रायपुर की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है और सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन अब किस तरह से इस डैमेज कंट्रोल की स्थिति को संभालता है।



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