Khamenei Funeral News : बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के एक संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के निधन के बाद, अब पूरे देश में उनके अंतिम संस्कार की रस्में जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। यह ऐतिहासिक और भव्य अंतिम संस्कार कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा। ईरान सरकार इस आयोजन को अत्यंत गरिमामय बनाने के लिए दिन-रात जुटी हुई है। इस वैश्विक महत्व के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत सहित दुनिया भर के प्रमुख नेताओं को आधिकारिक निमंत्रण भेजे गए हैं। फिलहाल, तेहरान स्थित इमाम खोमैनी हुसैनिया में दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां उन्हें विदाई देने के लिए भारी जनसमूह उमड़ पड़ा है।

इमाम रजा दरगाह के लाल ध्वज से ढका गया ताबूत
अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच एक तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, जिसमें दिवंगत सुप्रीम लीडर के ताबूत को इमाम रजा दरगाह के पवित्र लाल ध्वज से ढका गया है। यह ध्वज केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि शिया इस्लाम में अत्यंत गहरा प्रतीकात्मक महत्व रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लाल ध्वज सातवीं शताब्दी में कर्बला की लड़ाई में शहादत देने वाले पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे, हजरत इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत का प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से ईरानी नेतृत्व अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई इस हत्या की तुलना इमाम हुसैन की ऐतिहासिक शहादत से कर रहा है, जो शिया मुसलमानों के लिए एक अत्यंत भावुक और धार्मिक संदर्भ है।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा भारी जनसमूह और अधिकारियों की उपस्थिति
गुरुवार की शाम जब अयातुल्ला अली खामनेई का ताबूत दक्षिणी तेहरान के समारोह स्थल पर पहुंचा, तो वहां ईरानी अधिकारियों और आम नागरिकों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कार्यवाहक कमांडर अहमद वहीदी भी सार्वजनिक रूप से नजर आए, जो पिछले कुछ समय से सुरक्षा कारणों से सामने नहीं आ रहे थे। जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नादेर हाशमी के अनुसार, यह पूरा विदाई समारोह ईरान की रणनीतिक और धार्मिक विचारधारा को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है, जिसके जरिए वे अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत संदेश के रूप में दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं।
9 जुलाई को इमाम रजा दरगाह में होगा अंतिम संस्कार
ईरानी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि 9 जुलाई को पवित्र शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में अयातुल्ला खामनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। फरवरी में हुए हमले के बाद से ही ईरान में एक शोक की लहर है, और यह अंतिम संस्कार न केवल एक नेता की विदाई है, बल्कि ईरान की आंतरिक और बाह्य राजनीति के लिए भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। दुनियाभर के नेताओं की उपस्थिति इस अंतिम संस्कार को भू-राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण बना रही है। आने वाले दिनों में यह आयोजन मध्य पूर्व की राजनीति में होने वाले बड़े परिवर्तनों का आधार भी बन सकता है।












